रांची, [जागरण स्‍पेशल]। नवंबर-दिसंबर में संभावित झारखंड विधानसभा चुनाव की घोषणा इस महीने के आखिर में होने की पूरी उम्‍मीद है। सो, नेता-कार्यकर्ता भी तमाम तैयारियों में जुटे हैं। विपक्षी दल जहां महागठबंधन बनाकर भाजपा को सत्‍ता से बेदखल करने की वकालत कर रहे हैं, वहीं भाजपा 65 प्‍लस के लक्ष्‍य को मुमकिन बनाने में पूरी शिद्दत से जुटी है। यहां इस बार के विधानसभा चुनाव में बिहार में भाजपा के साथ सरकार चला रही एनडीए में शामिल जदयू पार्टी भी झारखंड में भाजपा के खिलाफ खड़ी नजर आ रही है।

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने झारखंड विधानसभा के चुनावी महासमर में अपनी भूमिका तय कर दी है। बिहार में वे जहां भाजपा के साथ सरकार चला रहे हैं वहीं झारखंड में उनके निशाने पर भाजपानीत गठबंधन सरकार होगी। वे यहां के चुनाव में उन मुद्दों पर ही फोकस करेंगे जिसपर उन्होंने बिहार में सख्ती से अमल किया और विरोधी दलों पर बढ़त कायम की है। शराबबंदी उसमें एक है। नीतीश कुमार शराबबंदी के पक्षधर रहे हैं। इसके अलावा जमीन संबंधी कानूनों को और सख्त करने की वकालत कर उन्होंने आदिवासी मतदाताओं को भी रिझाने की पूरी कोशिश की है।

ऐसा है सियासी गुणा-भाग
लोकसभा चुनाव में झारखंड में भाजपा का साथ देने वाला जदयू अबकी बार विधानसभा चुनाव में अपना वजूद दिखाने को उतावला है। पार्टी के सबसे बड़े नेता नीतीश कुमार और मंजे हुए चुनावी रणनीतिकार राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष प्रशांत किशोर ने साफ कर दिया है कि जदयू पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगा। ऐसे में मुकाबला राेचक होता दिख रहा है। विश्‍लेषक मानते हैं कि भाजपा के साथ बिहार में सरकार चलाने के कारण भले जदयू की बातों मेें वोटरों को अभी दम नहीं लग रहा है, लेकिन चुनावी जंग में नीतीश कुमार-प्रशांत किशोर की मौजूदगी से बीजेपी की मुश्किलें कमोबेश बढ़ेंगी।

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Posted By: Alok Shahi

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