रांची, राज्य ब्यूरो। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के केंद्र सरकार द्वारा भारतीय वन कानून, 1927 में संशोधन प्रस्ताव वापस लेने संबंधित बयान की जांच होगी। एक राजनीतिक दल द्वारा इससे आचार संहिता का उल्लंघन होने की शिकायत पर भारत निर्वाचन आयोग ने संबंधित बयान का वीडियो मंगाकर आयोग के समक्ष रखने का आदेश दिया है, ताकि उसकी जांच हो सके।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि कल ही उन्होंने इस संबंध में आयोग के पदाधिकारियों को निर्देश दे दिया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने झारखंड विधानसभा चुनाव की घोषणा के समय अपने उस कथन को दोहराया कि झारखंड में अभी भी 24 में से 19 जिले नक्सल प्रभावित हैं। इनमें से 13 अति नक्सल प्रभावित जिले हैं।

उन्होंने कहा कि यह आयोग का कहना नहीं है। केंद्र सरकार द्वारा 5 फरवरी 2019 को जारी अधिसूचना में ही इसका स्पष्ट उल्लेख किया गया है। यहां तक कि केंद्र ने नक्सल समस्या से निपटने के लिए स्वीकृत 775 करोड़ रुपये में झारखंड को ही 340 करोड़ रुपये विशेष सहायता राशि के रुप में दिए हैं। राज्य सरकार के नक्सल समस्या से मुक्ति के दावे के सवाल पर उन्होंने कहा कि उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों के साथ हुई बैठक में मिले फीडबैक से ऐसा प्रतीत नहीं होता है।

उसमें तो यह भी बात आई है कि नक्सली चुनाव में बाधा डालने के लिए कई नए साधन अपना सकते हैं। फिलहाल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने अपने दो दिनों के दौरे में पहले दिन राजनीतिक दलों तथा डीसी-एसपी तथा दूसरे दिन आयकर, वाणिज्य कर, उत्पाद, रेलवे आदि के नोडल पदाधिकारियों तथा मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी आदि के साथ हुई बैठकों में दिए गए निर्देश की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों की शिकायतों पर आयोग गंभीर है और इसे लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी व अन्य संबंधित विभागों को भी गंभीर होकर नियमानुसार कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। इस मौके पर निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा, सुशील चंद्रा, राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनय कुमार चौबे, पुलिस के राज्य नोडल पदाधिकारी एमएल मीणा आदि भी उपस्थित थे।

बहाली निकालने पर हिंदुस्तान कॉपर के अफसर तलब

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड में 47 पदों पर बहाली के लिए निकाले गए विज्ञापन की शिकायत मिलने पर इस लोक उपक्रम के अफसरों को तलब किया। अफसरों ने आयोग को बताया कि अब वे उस विज्ञापन पर आगे की कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि दिल्ली जाकर वे इसकी जांच करेंगे कि बहाली निकालने के लिए आयोग से अनुमति ली गई थी या नहीं? इस पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश आयोग के  पदाधिकारियों को दिया गया है। उन्होंने अखबारों के माध्यम से यह भी सूचना देने को कहा है कि उक्त बहाली रद कर दी गई है।

नहीं होने देंगे फर्जी मतदान, एनजीओ पर भी रहेगी नजर  

बांग्लादेशी घुसपैठिए द्वारा फर्जी मतदान की एक राजनीतिक दल आशंका पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने भरोसा दिलाया कि जो मतदाता योग्य हैं, वही वोट दे पाएंगे। फर्जी मतदान नहीं होगा। एनजीओ द्वारा विदेशी फंड के दुरुपयोग की शिकायत पर पर कहा कि विदेशी फंडिंग पर केंद्रीय एजेंसियां नजर रखती हैं। यह सोच लेना कि एनजीओ है तो ठीक काम नहीं कर रहा है, गलत है।

हालांकि ऐसे किसी भी प्रयास पर अंकुश लगाने का निर्देश राज्य के पदाधिकारियों को दिया गया है। राजनीतिक दलों द्वारा कुछ डीसी के सोशल मीडिया में सरकार का प्रचार करने की शिकायत पर कहा कि संबंधित दलों से ऐसे डीसी के नाम मांगे गए थे। इसके लिए उन्हें समय भी दिया गया, लेकिन वे नाम नहीं बता सके। उन्होंने सोशल मीडिया पर निगरानी तथा हाल ही में लागू 'वोल्यूंटरी कोड ऑफ इथिक्स' के तहत कार्रवाई की बात कही।

धन के दुरुपयोग रोकने के लिए विशेष पर्यवेक्षक

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि चुनाव में धन के दुरुपयोग रोकने के लिए विशेष पर्यवेक्षक के रूप में बी मुरली कुमार की नियुक्ति की गई है। उन्होंने अपना काम शुरू भी कर दिया है। बताया कि इनकी रिपोर्ट पर ही तमिलनाडु के वेल्लोर में दोबारा चुनाव कराया गया था।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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