चाकुलिया, पंकज मिश्रा। Bahragora Jharkhand Election Result  करीब 60 हजार से अधिक मतों से बहरागोड़ा सीट पर हार का सामना करने वाले पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी यह नहीं मानते कि पार्टी बदलने के कारण उनकी हार हुई। वे यह भी नहीं मानते कि चुनाव से ठीक पूर्व पार्टी बदल कर उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ कोई धोखा किया।

उनका कहना है कि झामुमो छोड़कर भाजपा में शामिल होना परिस्थितियों की मांग थी तथा इसमें बहरागोड़ा विधानसभा क्षेत्र की जनता का हित शामिल था। झामुमो छोडऩे के बाबत पूछने पर कुणाल कहते हैं- कुछ तो मजबूरियां रही होंगी यूं ही कोई बेवफा नहीं होता। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर वह कौन सी मजबूरी या परिस्थिति थी जिसने कुणाल षाड़ंगी को झामुमो छोडऩे पर विवश किया। इस संबंध में पूर्व विधायक का कहना है कि लोकसभा चुनाव के बाद जिस तरह पार्टी के भीतर एक बड़े नेता ने मुझ पर आरोप लगाया तथा पार्टी नेतृत्व के समक्ष लिखित शिकायत की, उससे मुझे काफी धक्का लगा। क्योंकि मैंने लोकसभा चुनाव में जी तोड़ मेहनत किया था तथा पार्टी प्रत्याशी को जिताने की कोशिश की थी। झामुमो छोडऩे से पूर्व भी मैंने हेमंत सोरेन से मिलकर उन्हें अपने निर्णय से अवगत करा दिया था। इसलिए यह कहना गलत है कि मैंने झामुमो को धोखा दिया।

समीर को मिला वारंट निकलने का लाभ

भाजपा एक राष्ट्रीय पार्टी है और केंद्र में भी इसकी सरकार है। लिहाजा केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार बनने पर बहरागोड़ा विधानसभा क्षेत्र की जनता के लिए विकास का अधिक काम हो पाता। यही सोच कर मैंने भाजपा का दामन थामा। ङ्क्षजदगी में कुछ निर्णय सही होते हैं और कुछ गलत। कुणाल कहते हैं कि उन्हें पूरा विश्वास है कि वह शानदार वापसी करेंगे। चुनाव में हार के कारणों के बाबत पूछने पर कुणाल कहते हैं कि पार्टी के सारे पदाधिकारियों ने अपनी क्षमता के अनुरूप ईमानदारी से काम किया। मैं किसी पर दोषारोपण करना नहीं चाहता। लंबे समय से राजनीति में सक्रिय होने तथा चुनाव से पूर्व वारंट निकलने के कारण समीर महंती को सहानुभूति का लाभ मिला और वह जीत गए।

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