रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand Assembly Election 2019 तेजी से खिसकती राजनीतिक निष्ठा के दौर में झाविमो प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी खासे चिंतित है। पिछले पांच सालों में अपने सबसे ज्यादा विधायक उन्होंने ही खोये हैं। 2014 में चुनाव परिणाम आते ही जहां उनके छह विधायक भाजपा में शामिल हो गए। वहीं अभी पिछले महीने ही उनकी पार्टी के ही लातेहार के विधायक प्रकाश राम ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। ऐसे में बाबूलाल टिकट देते समय ही उम्मीदवारों को पार्टी नहीं छोडऩे की कसम दिला रहे हैं।

बताते चलें कि भाजपा से अलग होकर बाबूलाल मरांडी ने 2006 में  जब झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) प्रजातांत्रिक का गठन किया, विक्षुब्धों की एक बड़ी टोली भाजपा छोड़कर उनके साथ उनकी राह पर निकल पड़ी थी। पूर्व भाजपा अध्यक्ष रवींद्र राय, बोकारो के पूर्व विधायक समरेश सिंह, पूर्व एमएलसी प्रवीण सिंह, दीपक प्रकाश सरीखे कई नेता झाविमो के हिस्सा बन गए। नई पार्टी होने के बावजूद 2009 में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर झाविमो ने नौ सीटें हासिल की। 2014 में अकेले चुनाव लड़कर भी उसे आठ सीटें मिलीं। यह बात अलग है कि इनमें से सात भाजपा में शामिल हो गए और दो मंत्री भी बन गए।

इधर, पार्टी के भीतर चल रही खींचतान के बीच भाजपा से झाविमो में शामिल हुए एक-एक नेता बाबूलाल को छोड़कर चलते बने। यूं कहें, उनका कुनबा बनता-बिखरता रहा। बहरहाल, बाबूलाल ने सबसे पहले प्रथम चरण के चुनाव के लिए 13 में से नौ प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। 2014 के चुनाव में भी उन्होंने नए चेहरे को तवज्जो दी थी। इस बार भी उन्होंने यही फार्मूला अपनाया है। इस बार कई ऐसे लोगों को भी झाविमो प्रत्याशी बनाया है, जिन्होंने महज एक दिन पहले झाविमो की सदस्यता ग्रहण की थी। डालटेनगंज के डा. राहुल अग्रवाल इसकी बानगी हैं, जो गुरुवार को झाविमो का हिस्सा बने और शुक्रवार को उन्हें सिंबल थमा दिया गया। अब इन नए चेहरों से बाबूलाल की चुनावी वैतरणी किस किनारे लगेगी, भविष्य तय करेगा।

Posted By: Alok Shahi

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