धनबाद [आशीष झा]। सदियों से खनन जनित समस्याओं को जीवन का हिस्सा मान चुके कोयलांचलवासियों के सामने धूल-धुएं के मुद्दे को राष्ट्रीय पहचान मिल गई है। स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने इसे धनबाद के मंच से पहचान दिलाई है। इसके बाद तो तमाम नए-पुराने मुद्दे भी उभरकर सामने आते दिख रहे हैं। विपक्ष उपेक्षा और असफलताओं की तमाम सूची लिए निकल पड़ा है। सीन बदलने की बेचैनी भी इसका अहम कारण है। ऐसे ही तमाम मुद्दों के बीच बेचैनी से कोयलांचल करवटें ले रहा है और अगले दो दिनों में तय हो जाएगा कि आखिर किस करवट में इस इलाके को चैन की नींद नसीब होगी।

पीएम की सभा के बाद नए मुद्दे की एंट्रीः धूल, धुआं और इससे होनेवाली बीमारियों को कभी इलाके के लोगों ने बड़ा मुद्दा नहीं माना। पीने के पानी को लेकर भले आंदोलन हुए हों, स्वच्छ वातावरण पर कभी चर्चा ही नहीं हुई। धूल से बचाने के लिए पानी छिड़काव का नियम सड़कों पर कीचड़ जमा करने के काम आता रहा लेकिन ग्रामीणों का जीवन कभी बदलने की चिंता नहीं हुई। अपनों को भी नहीं और सियासतदानों को भी नहीं। ऐसे में प्रधानमंत्री के जाने के बाद यह मुद्दा कोयला क्षेत्र के जेहन में उतरता दिख रहा है। धनबाद-पाथरडीह-सिंदरी मार्ग पर अलसुबह ट्रकों के चलने से बने धुएं के गुबार के बीच अपनी दुकान चला रहे शंकर सिंह को कभी ऐसा नहीं लगा कि यह धुआं जानलेवा भी हो सकता है। शंकर जैसे तमाम लोगों को इसकी आदत सी हो गई है। चेहरे पर जमे धूल और प्रदूषण से लाल हुई आंखों ने कभी बेहतर वातावरण का सपना ही नहीं देखा। अब सभी सोचने को मजबूर हुए हैं।

पानी, बिजली और सड़क प्रमुख मुद्दाः कतरास कोयलांचल के गोविंदपुर कोलियरी क्षेत्र में आकाशकिनारी प्रोजेक्ट में आउटसोर्सिंग कंपनी के अधीन काम कर रहे अरशद की चिंता धूल से हो रही बीमारियों को लेकर तो है लेकिन मजबूरी में इस पेशे को छोड़ भी नहीं सकते। यहीं पर हाइवा चालक सुल्तान मुद्दे पर मुस्कुराकर आगे बढ़ते हैं लेकिन पास के गांव में रहनेवाले विजय पासवान को बच्चों की चिंता है। इस मुद्दे पर कोयलांचल के कई क्षेत्रों में चर्चा बढ़ता दिख रहा है और आसपास के क्षेत्रों में भी असर है। लेकिन, मोदी के मुद्दे पर विपक्ष चुप रहनेवाला नहीं। सधी चाल चली जा रही है। इस बार बयानों में संतुलन है और हमला सिर्फ राज्य सरकार और राज्य व्यवस्था पर। केंद्र पर हमला करने का जोखिम लेकर विपक्ष लोकसभा चुनाव जैसा हश्र नहीं चाहता है। सड़क, बिजली, पानी के मुद्दे लगातार उठाए जा रहे हैं।

नए चेहरों की प्रतिष्ठा दांव परः धनबाद में बिजली बड़ा मुद्दा है और इसको लेकर विश्वास का वातावरण बनने में देरी है। इसी देरी का फायदा विपक्ष उठाने की फिराक में है। भाजपा ने चुनावी समर में कई नए चेहरे इंट्रोड्यूस किए हैं। सिंदरी से इंद्रजीत महतो और टुंडी से विक्रम पांडे नए चेहरे के साथ-साथ फर्स्ट टाइमर हैं तो निरसा की पूर्व विधायक अपर्णासेन गुप्ता पहली बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। झरिया में झेठानी-देवरानी रागिनी सिंह और पूर्णिमा सिंह की लड़ाई भी रोचक है। इन नए चेहरों की चमक दिख रही है लेकिन पुराने चेहरे भी मुस्कुराने की कोशिश में जुटे हुए हैं। मन्नान मल्लिक इसी चाहत की बदौलत ढलती उम्र में भी मोर्चा संभाले हुए हैं। सिंदरी में सीनियर नेताओं फूलचंद मंडल और आनंद महतो की लड़ाई के बीच युवा मंटू महतो अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल दिख रहे हैं। जलेश्वर महतो, राजकिशोर महतो, सबा अहमद सरीखे नेता भी युवाओं को चुनौती देने में पीछे नहीं दिख रहे।

भितरघात का बड़ा खतरा झेल रहे प्रत्याशी

धनबाद जिले के छह विधानसभा क्षेत्रों में अभी सत्तापक्ष और विपक्ष के प्रत्याशियों के सामने भितरघात का खतरा सबसे बड़ी चुनौती है। जिन चेहरों को बदलकर नए उम्मीदवारों को सत्तापक्ष ने उतारा है उनके खिलाफ भी अपने ही खतरा पैदा कर रहे हैं। इसी प्रकार कांग्रेस प्रत्याशियों के सामने अपने नेताओं की मदद नहीं करनेवालों की फौज खड़ी है। कई अभी से निष्क्रिय बैठे हैं।

Posted By: Mritunjay

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