रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand Election Result 2019 जहां झामुमो-कांग्रेस-राजद को गठबंधन के तहत चुनाव लडऩे का फायदा सत्ता के रूप में मिला। वहीं गठबंधन टूटने से भाजपा और आजसू दोनों को ही जबर्दस्त नुकसान हुआ। यदि दोनों दल साथ-साथ चुनाव लड़ते तो नतीजा कुछ और हो सकता था। विधानसभा चुनाव के परिणाम को देखकर ऐसा ही लगता है।

चुनाव परिणाम के अनुसार, सिर्फ गठबंधन टूटने से भाजपा को चार तथा आजसू को दो सीटें गंवानी पड़ीं। ये वे सीटें थीं जिनपर दोनों दलों का कब्जा था। आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि इन सीटों पर दूसरे दलों के विजेता प्रत्याशियों को कुल मिले वोट भाजपा और आजसू के प्रत्याशियों को कुल मिले वोट से कम हैं। उदाहरण के रूप में खिजरी सीट भाजपा के हाथ से निकल गई। यहां कांग्रेस के प्रत्याशी को 83,829 वोट मिले। सीटिंग विधायक रामकुमार पाहन महज 5,469 वोट से पिछड़ गए। दूसरी तरफ आजसू प्रत्याशी को 29,091 वोट मिले।

साफ है कि यदि यहां आजसू अपना प्रत्याशी नहीं देती तो यह सीट भाजपा को नहीं गंवानी पड़ती। इसी तरह, गांडेय में झामुमो के प्रत्याशी सरफराज अहमद ने 65,023 वोट से जीत हासिल की। यहां भाजपा और आजसू दोनों के प्रत्याशियों को मिले कुल वोट इस वोट से अधिक हैं। ऐसे में यदि यहां भाजपा और आजसू संयुक्त रूप से प्रत्याशी देती तो नतीजा कुछ और हो सकता था। भाजपा को यह सीट गंवानी नहीं पड़ती।

अलग-अलग चुनाव लडऩे से मधुपुर में भी भाजपा को अपनी सीट गंवानी पड़ी। यहां से मंत्री राज पलिवार चुनाव हार गए और यह सीट वापस झामुमो के खाते में चली गई। वहीं आजसू के प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे। यदि इन दोनों दलों के प्रत्याशियों को कुल मतों को जोड़ दें तो यह विजेता प्रत्याशी से काफी अधिक होता है। दूसरी तरफ, आजसू को भाजपा के साथ नहीं लडऩे से रामगढ़ और जुगसलाई सीट गंवानी पड़ी। यहां भी भाजपा अपना प्रत्याशी नहीं देती तो नतीजा कुछ और होता। आजसू इन दोनों सीटों पर काफी मजबूत थी, लेकिन भाजपा के प्रत्याशी देने से समीकरण बदल गए।

इन चार सीटों पर कर सकते थे कब्जा

भाजपा और आजसू साथ-साथ लड़ती तो उन चार सीटों पर भी हासिल कर पाती, जिन सीटों पर दूसरे दलों का कब्जा था। इनमें डुमरी, बड़कागांव, लोहरदगा और घाटशिला शामिल हैं। डुमरी में झामुमो प्रत्याशी जगरनाथ महतो को भी भाजपा और आजसू दोनों प्रत्याशियों को अलग-अलग लडऩे का लाभ मिला। यहां भाजपा और आजसू दोनों के प्रत्याशियों के कुल मिले वोट को जोड़ दें तो यह झामुमो प्रत्याशी को मिले वोट से अधिक हो जाता है। बड़कागांव में भी जीत हासिल करनेवाली कांग्रेस प्रत्याशी अंबा प्रसाद को भाजपा और आजसू दोनों प्रत्याशियों को कुल मिले वोट से कम वोट मिले। यदि यहां भाजपा अपना उम्मीदवार नहीं देती तो आजसू को लाभ मिलता।

इसी तरह, लोहरदगा में भी भाजपा और आजसू को अलग-अलग लडऩे से कांग्रेस को लाभ हुआ। इसी सीट को लेकर ही आजसू ने भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ दिया था। लेकिन इस सीट पर दोनों के प्रत्याशियों की हार हुई। घाटशिला में भी भाजपा और आजसू दोनों के प्रत्याशियों को मिल कुल वोट झामुमो के विजेता प्रत्याशी से अधिक हैं। गठबंधन होता तो इस सीट पर आजसू अपना प्रत्याशी नहीं देती क्योंकि गठबंधन टूटने के बाद प्रदीप बलमुचू ने कांग्रेस छोड़कर आजसू में शामिल होकर यहां से चुनाव लड़ा था।

ये सीटें गंवानी पड़ी भाजपा को

खिजरी, गांडेय, ईचागढ़ तथा मधुपुर। 

ये सीटें गंवानी पड़ी आजसू को

रामगढ़ तथा जुगसलाई।

 

जीतेगा भारत हारेगा कोरोन

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