रांची, [जागरण स्‍पेशल]। नवंबर-दिसंबर में होने वाले झारखंड के विधानसभा चुनाव में अपनी सशक्‍त उपस्थिति दर्ज कराने को आतुर बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने 83 फीसद आरक्षण दिए जाने का शिगूफा छोड़ा है। ऐन चुनाव के पहले राग रिजर्वेशन गाते हुए प्रदेश अध्‍यक्ष ने बता दिया है कि जनता दल यूनाइटेड (जदयू) इस चुनाव में वोटरों को साधने की उन तमाम तरीकों की आजमाइश करेगी, जिसका लोगों से सीधा जुड़ाव हो। बहरहाल जदयू ने आरक्षण को बढ़ाने की वकालत कर अपने विरोधियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

83 फीसद आरक्षण की वकालत
राज्य में 83 फीसद आरक्षण की वकालत जदयू ने की है। झारखंड के राज्यपाल द्रौपदी मूर्मू को इस बारे में पत्र भेजकर पार्टी ने पहल किए जाने की मांग की है। जदयू ने इस संदर्भ में तर्क दिया है कि 21 सितंबर 2001 को कैबिनेट स्तर से पारित 73 फीसद (अनुसूचित जनजातियों को 32, अनुसूचित जातियों को 14 तथा ओबीसी को 27 फीसद) आरक्षण को प्रभावी बनाया जाना चाहिए। 

आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 फीसद आरक्षण
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने कहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो को 10 फीसद आरक्षण देने के केंद्र के निर्देश के बाद झारखंड हाईकोर्ट के 50 फीसद आरक्षण की सीमा नहीं लांघने की बात बेमानी हो चुकी है। इसे केंद्र में रखकर कैबिनेट स्तर से पारित आरक्षण को लागू किया जाना चाहिए।

ओबीसी वोटरों पर नजर
माना जा रहा है कि जदयू अपने आरक्षण राग के जरिये आेबीसी वोटरों को साधने की जुगत में है। ओबीसी कोटा बढ़ाए जाने की मांग से झारखंड विधानसभा चुनाव में उसे कमजोर वर्ग के मतदाताओं का वोट हासिल करने में मदद मिलेगी। ऐसे में भाजपा के बड़े जनाधार को भी चुनौती दी जा सकेगी। भाजपा के बारे में कहा जाता है कि झारखंड में मुख्‍य तौर पर ओबीसी ही उनका आधार वोटर है। ओबीसी वोट बैंक में सेंध लगाने में जुटा जदयू बिहार की अपनी सहयोगी पार्टी पर इस दांव को दबाव की रणनीति के रूप में आजमा रहा है। 

Posted By: Alok Shahi

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