रांची, राज्य ब्यूरो।  जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने झारखंड विधानसभा के चुनावी महासमर में अपनी भूमिका तय कर दी है। बिहार में वे जहां भाजपा के साथ सरकार चला रहे हैं, वहीं झारखंड में उनके निशाने पर भाजपानीत गठबंधन सरकार ही होगी। वे उन मुद्दों पर ही फोकस करेंगे, जिसपर उन्होंने बिहार में सख्ती से अमल किया है। शराबबंदी उसमें एक है।

नीतीश कुमार शराबबंदी के पक्षधर रहे हैं। इसके अलावा, जमीन संबंधी कानूनों को और सख्त करने की वकालत कर उन्होंने आदिवासी मतदाताओं को भी रिझाने की कोशिश की है। शनिवार को यहां जदयू के कार्यकर्ता सम्मेलन में उनकी मौजूदगी और खास मुद्दों पर फोकस यह संकेत दे रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में वे धारदार अभियान चलाकर राज्य में संगठन को मजबूती कराने की दिशा में सक्रियता से पहल करेंगे। इस कड़ी में उन्होंने राज्य इकाई को पुनगर्ठित करते हुए कई ऐसे चेहरों को जोड़ा है, जो प्रभावी हो सकते हैं।

जदयू की झारखंड इकाई के अध्यक्ष सालखन मुर्मू के मुताबिक नीतीश कुमार इस राज्य के मुद्दों को लेकर संवेदनशील हैं। शराबबंदी एक अहम मसला है। किसी राजनीतिक दल ने इसपर कभी ईमानदार कोशिश नहीं की। नीतीश कुमार ने बिहार में शराबबंदी को प्रभावी तरीके से लागू करने में कामयाबी पाई। इसके बेहतर परिणाम दिख रहे हैं। झारखंड में भी वे शराबबंदी की मुहिम चलाएंगे। राज्य की भाजपा सरकार शराब दुकानें खोल रही है। जनविरोधी कार्यों को उजागर कर जदयू जनता के बीच जाएगी। सीएनटी-एसपीटी एक्ट से छेड़छाड़ नहीं करने दिया जाएगा। 

आरक्षण प्रतिशत बढ़ाने की भी मुहिम
जदयू ने आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने की भी वकालत की है। इसे संगठन के राजनीतिक प्रस्ताव में शुमार किया गया है। इसके मुताबिक कुल 73 प्रतिशत आरक्षण देने का लक्ष्य है। इसमें अनुसूचित जनजाति को 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 14 प्रतिशत, ओबीसी को 27 प्रतिशत समेत अन्य को 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान होगा। इससे जदयू को विभिन्न तबके को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। 

नए साथियों की भी तलाश
जदयू फिलहाल विधानसभा चुनाव अकेले दम पर लडऩे का एलान कर रही है, लेकिन इसमें राजनीतिक साथी जुड़ सकते हैं। कयास लगाया जा रहा है कि झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के प्रमुख बाबूलाल मरांडी से इस बाबत बातचीत हुई है। बाबूलाल के जदयू प्रमुख नीतीश कुमार से बेहतर संपर्क हैं। हालांकि, इस बाबत राज्य इकाई फिलहाल कुछ भी स्पष्ट करने की स्थिति में नहीं है।

Posted By: Alok Shahi

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