रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand Assembly Election 2019 चौथे चरण की जिन 15 सीटों पर 16 दिसंबर को मत डाले जाएंगे, उन सीटों पर 2014 के चुनाव में किस्मत आजमा चुके प्रत्याशियों में से 85 फीसद की जमानत जब्त हो गई थी। आंकड़ों की बात करें तो 232 उम्मीदवारों में से 198 अपनी जमानत तक नहीं बचा सके थे। इनमें समरेश सिंह, डा. सबा अहमद सरीखे नेता भी शामिल हैं। इन्होंने क्रमश: बोकारो और टुंडी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से अपनी किस्मत आजमाई थी। बोकारो विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से सर्वाधिक 29 प्रत्याशियों ने किस्मत आजमाई थी। उप विजेता रहे समरेश सिंह को उन्होंने 72,643 मतों के अंतर से हराया था।

निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार मधुपुर विधानसभा से कुल 15 प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई थी, उनमें से 13 की जमानत जब्त हो गई थी। इसी तरह देवघर में 13 में से 11, बगोदर में 15 में से 13, जमुआ में 11 में से 09, गांडेय में 19 में से 19 में से 16, गिरिडीह में 14 में से 11 तथा डुमरी में 17 में से 15 प्रत्याशी जमानत बचाने में असफल रहे थे। अन्य विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की बात करें तो बोकारो में 29 में से 28, चंदनकियारी में 11 में से 09, सिंदरी में 22 में से 19, निरसा में 12 में से 09, धनबाद में 13 में से 11, झरिया में 15 में से 13, टुंडी में 11 में से 08 तथा बाघमारा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में किस्मत आजमाने वाले 15 में से 13 उम्मीदवारों की जमानत नहीं बची थी।

किस परिस्थिति में जब्त होती है जमानत

किसी खास विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी जो संबंधित सीट के लिए पड़े कुल मत का कम से कम छठा फीसद हिस्सा ला पाता है, उसकी ही जमानत बच सकती है। इसे ऐसे समझें कि अगर किसी विधानसभा क्षेत्र में कुल एक लाख मतदाता मतदान करते हैं तो जमानत बचाने के लिए प्रत्याशी को कम से कम 16,666 मत लाना होगा।

किस परिस्थिति में वापस होती है राशि

  1. जब किसी उम्मीदवार का नामांकन खारिज हो जाता है।
  2. वोटिंग शुरू होने से पहले किसी उम्मीदवार की मौत हो जाती है तो राशि परिजनों को लौटा दी जाती है।
  3. कुल वोट का छठे हिस्से से अधिक मत ले आता है तब।
  4. छठे हिस्सा इतना वोट नहीं लाता है, फिर भी चुनाव जीत जाता है तो जमानत राशि लौटा दिए जाने का प्रावधान है।

 

Posted By: Alok Shahi

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