रांची, [विनोद श्रीवास्तव]। यह लोकतंत्र हैं, जहां हर किसी को हर फील्ड में किस्मत आजमाने का अधिकार है। और जब बात आम चुनाव की हो तो क्या कहने? विधानसभा चुनाव 2014 की बात करें तो कुल 66 राजनीतिक पार्टियों ने अपनी किस्मत आजमाई थी। विधानसभा की कुल 81 सीटों के विरुद्ध दलों ने 1136 प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा था। इनमें 1025 पुरुष तथा 111 महिलाएं थी।

इससे इतर इस चुनाव में सिर्फ 268 प्रत्याशी ही अपनी जमानत बचा पाए थे। शेष 868 की जमानत राशि जब्त हो गई थी। इनमें से सिर्फ विश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र ही ऐसा था, जहां छठे पायदान पर रहे प्रतिद्वंद्वी भी जमानत बचाने में सफल रहे थे। सात विधानसभा क्षेत्रों में पांच, 22 विधानसभा क्षेत्रों में चार, 37 सीटों पर तीन, जबकि 12 सीटों पर सिर्फ विजेता और उप विजेताओं की ही जमानत बची थी।

बाहरी राज्यों के आठ दलों ने भी आजमाई थी किस्मत

विधानसभा चुनाव में बाहर के राज्यों में निबंधित आठ दलों ने भी अपनी किस्मत आजमाई थी। उनमें एआइटीसी, एसपी, एलजेपी, जदयू, एसएचएस, आरएसपी, एआइएफबी तथा आईयूएमएल पार्टियां शामिल थी। इससे इतर छह राष्ट्रीय, राजद, आजसू, झामुमो और झाविमो जैसी राज्य स्तरीय पार्टियों के अलावा 48 अन्य दलों और संगठनों ने भी अपनी किस्मत आजमाई थी।

किस स्तर की पार्टियों को कितने मिले थे वोट

सीपीआइ, बीएसपी, कांग्रेस, भाजपा, सीपीएम और एनसीपी जैसी राष्ट्रीय स्तर की पार्टियों को विस चुनाव 2014 में पड़े कुल मतों में से अकेले 45.27 फीसद मत हासिल हुए थे। राज्य स्तर की चार पार्टियों को 37.22, अन्य राज्यों में निबंधित आठ दलों को 2.78 फीसद मत हासिल हुए थे।

कैसे बचती है जमानत

कोई भी प्रत्याशी चुनाव लडऩे के लिए जब नामांकन पत्र दाखिल करता है, उसे एक निश्चित राशि जमानत के तौर पर आयोग के नाम जमा करनी होती है। जब कोई भी प्रत्याशी किसी भी चुनाव क्षेत्र में कुल पड़े वैध वोट का छठा हिस्सा हासिल नहीं कर पाता है तो उसकी जमानत राशि जब्त कर ली जाती है। अगर किसी खास निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं ने कुल एक लाख वोट दिए हैं तो कम से कम 16666 वोट लाने वाले प्रत्याशियों की ही जमानत बचेगी।

Posted By: Alok Shahi

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