भिवानी, [बलवान शर्मा]। Haryana Assembly Election 2019 में मतदान के बाद अब मतों की गिनती पर सबकी नजर है। जिले की तोशाम सीट बेहद महत्‍वपूर्ण बन गई है और यहां रोचक मुकाबला है। इस Hot Seat के मुकाबले की बात करें तो यहां से कोई उम्‍मीदवार जीते, लेकिन नया रिकार्ड बनेगा। मुकाबला मुख्य रूप से कांग्रेस की वरिष्‍ठ नेता किरण चौधरी और भाजपा के प्रत्याशी शशिरंजन परमार के बीच है। हालांकि जजपा व इनेलो भी चुनाव मैदान में हैं पर उनकी लड़ाई एक दूसरे से आगे निकलने की ही दिखाई दे रही है।

बंसीलाल के गढ़ को बचाने में जुटी दिखाई दी किरण व श्रुति

तोशात सीट से जीत की हैट्रिक बना चुकी किरण चौधरी इस बार विजयी होती हैं तो वह अपने पति सुरेंद्र सिंह से आगे निकल जाएंगी। दूसरी ओर, यदि शशिरंजन परमार बाजी मारते हैं तो सांसद धर्मबीर सिंह के बाद दूसरे व्यक्ति होंगे, जो बंसीलाल परिवार को हराएंगे। तोशाम में इस बार विधानसभा चुनाव कई मायने में जुदा-जुदा नजर आया। 2014 में भाजपा प्रत्याशी गुणपाल जमानत भी नहीं बचा पाए थे, वहीं इस बार मुकाबला कांटे का है। 

पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल और परिवार का गढ़ माने जानेवाले इस क्षेत्र में भाजपा ने अपने उम्मीदवार के लिए पूरी ताकत झोंकी। दूसरी ओर, चौधरी बंसीलाल की पुत्रवधू किरण चौधरी अपनी पूर्व सांसद बेटी के साथ प्रचार में जुटी रही। पुराने भिवानी जिले के छह विधानसभा क्षेत्रों भिवानी, तोशाम, बवानीखेड़ा, लोहारू, चरखी दादरी व बाढड़ा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से लेकर रक्षामंत्री राज नाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल सहित कई बड़े नेता रैलियों को संबोधित किया।  भिवानी जिले में अपना परचम लहराने के लिए भाजपा अपने तरकस के सभी तीर इस्तेमाल किए। दूसरी तरु कांग्रेस की ओर से कोई बड़ा नेता यहां नहीं आया।

चौधरी बंसीलाल के निधन के बाद किरण चौधरी हरियाणा की कांग्रेस सरकार में मंत्री बनीं। वह विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता भी रहीं और चुनाव की घोषणा से ऐन पहले उनकी जगह पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को यह पद दे दिया गया। किरण की जीत या हार उनकी सियासत की अगली राह भी तय करेगी

पिछले 13 चुनावों में 11 बार बंसीलाल व उनके परिवार के सदस्य तोशाम से चुनते आ रहे हैं। केवल दो बार धर्मबीर सिंह को बाजी हाथ लगी है।

तोशाम हलके का इतिहास

सन       विजेता

1967   बंसीलाल

1968   बंसीलाल

1972  बंसीलाल

1977  सुरेन्द्र सिंह (बंसीलाल के छोटे बेटे)

1982   सुरेन्द्र सिंह

1987   धर्मबीर सिंह

1991  बंसीलाल

1996   बंसीलाल

2000  धर्मबीर सिंह

2005  सुरेन्द्र सिंह

2005 उपचुनाव किरण चौधरी

2009 किरण चौधरी

2014 किरण चौधरी

 

Posted By: Sunil Kumar Jha

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