रेवाड़ी [महेश कुमार वैद्य]। हमारा दायरा अहीरवाल नहीं है। कुएं के मेंढक बनने की जरूरत नहीं है। तुम पंख फैलाकर उड़ान भरना सीख लो..। अपने खास समर्थकों को केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह पिछले कुछ वषों से बार-बार यही नसीहत देते रहे हैं। भिवानी में राज्य स्तरीय शहीदी दिवस समारोह आयोजित करने के मायने भी इसी से जुड़े हैं। यह अहीरवाल से बाहर खुद की स्वीकार्यता बढ़ाने की मंशा को जाहिर करने का बाउंसर है। सुनहरे राजनीतिक भविष्य के लिए राव पांच दशक पीछे झांक रहे हैं। मकसद साफ है। खुद की शक्ति बढ़ेगी तो सत्ता में भी भागीदारी बढ़ेगी।

राव भिवानी रैली के बहाने पिता राव बिरेंद्र सिंह का पांच दशक पूर्व आजमाया हुआ राजनीतिक फार्मूला आजमा रहे हैं। जिस तरह राव बिरेंद्र सिंह ने तब सिरसा, रोहतक व हिसार के कुछ गैर यादव नेताओं के सहारे अहीरवाल से बाहर राजनीतिक शक्ति हासिल की थी, राव इंद्रजीत उसी राह पर हैं। चौ. धर्मबीर सिंह की भिवानी की जाट बेल्ट में अच्छी खासी पकड़ है। उन्हें चौ. बंसीलाल परिवार का धुर विरोधी माना जाता है। धर्मबीर अब लंबे समय से राव इंद्रजीत के साथ कदमताल कर रहे हैं।

जनरल वीके सिंह का भिवानी के समारोह में आना भी अहम है। जातीय समीकरण के लिहाज से भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र में उनकी भी रुचि रही थी। यहां राजपूतों की अच्छी-खासी आबादी है। भिवानी जिले में यादवों के कुछ बड़े गांव भी हैं। वर्ष 1968 में राव बिरेंद्र सिंह की विशाल हरियाणा पार्टी ने भिवानी की बाढ़ड़ा सीट, सिरसा की ऐलनाबाद व हिसार की टोहाना सीटें भी जीती थी।

राव परिवार के लिए बड़े फैसलों का दिन रहा है शहीदी दिवस

राव परिवार के लिए 23 सितंबर का दिन बड़े राजनीतिक फैसलों व रैलियों का रहा है। हरियाणा वीर एवं शहीदी दिवस का आयोजन जंग-ए-आजादी के महानायक राव तुलाराम की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में होता है। राव बिरेंद्र सिंह ने इसी दिन रेवाड़ी में रैली करके इंदिरा गांधी की मौजूदगी में वीएचपी का कांग्रेस में विलय किया था। 23 सितंबर 2013 को ही राव इंद्रजीत सिंह ने रेवाड़ी में रैली करके कांग्रेस से अपने 35 वर्ष पुराने रिश्ते को तोड़ने का एलान किया था। कुछ दिन बाद ही राव भाजपाई बन गए थे।

डहीना रैली के बाद अपना लिए थे तेवर आक्रामक

पिछले माह डहीना में हुई रैली के बाद राव दिनों-दिन आक्रामक हो रहे हैं। डहीना में अपने खास समर्थक विधायक बिक्रम सिंह के भाषण के दौरान हुई हूटिंग के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रति अपने सुर नरम कर लिए हैं। साथ ही सीएम पद की दावेदारी से भी खुद को दूर कर लिया है, लेकिन अपने धुर विरोधी पूर्व मंत्री जगदीश यादव को भाजपा में शामिल किया जाना उनका क्रोध बढ़ा रहा है। बेटी आरती राव की टिकट पर हो रही किंतु-परंतु भी राव को नहीं भा रही है। ऐसे में राव बड़ा दायरा दिखाकर कुछ बड़ा पाने की मंशा रख रहे हैं।

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Posted By: Mangal Yadav

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