नई दिल्ली [बिजेंद्र बंसल]। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के मापदंड पर हरियाणा विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों की पहली सूची तैयार हो चुकी है। इस सूची में 50 नाम हैं और इनकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेश लौटने के बाद होने वाली केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक से मुहर लगवाने के बाद हो जाएगी।

चुनाव समिति की बैठक 29 सितंबर को होने की संभावना है। बकाया 40 सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों की सूची कांग्रेस व अन्य दलों के नेताओं द्वारा जारी सूची के आधार पर की जाएगी। इन 40 सीटों पर भी पार्टी ने दो नाम तय कर लिए हैं। सत्तारूढ़ दल भाजपा को भी अपने प्रत्याशी चयन करने के लिए इस बार कई कारणों से ज्यादा माथापच्ची करनी पड़ रही है। इसके ज्यादा प्रमुख कारण राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की पसंद, दूसरे दलों से आए जिताऊ नेताओं से लेकर कॉडर आधारित नेताओं के बीच टिकट बंटवारा हैं।

खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल चूंकि स्वयं संघ पृष्ठभूमि के हैं इसलिए वे संघ नेताओं के हर आदेश को मानना चाहते हैं। इसके अलावा वे राजनीतिक रूप से उन नेताओं को भी टिकट दिलाना चाहते हैं जिन्होंने पिछले पांच साल उन्हें सरकार चलाने में मदद की। मुख्यमंत्री को पार्टी के कुछ बड़े नेताओं की सिफारिशों का भी समायोजन करना पड़ रहा है क्योंकि इस बार पार्टी की हवा सकारात्मक है। सिफारिशें इसलिए ज्यादा भी आ रही हैं।

2014 से भिन्न है इस बार स्थिति

2009 में तो तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष कृष्णपाल गुर्जर को कई क्षेत्रों में टिकटार्थी ढूंढकर लाने पड़े और कई नेताओं को तो उनके घर जाकर मिन्नत करके टिकट दिए थे। 2014 में चूंकि केंद्र में भाजपा की सरकार बन गई थी इसलिए टिकटों की मारामारी थी, मगर इनके चयन में इतनी बड़ी समस्या नहीं थी। तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष रामबिलास शर्मा ने टिकटार्थियों के पैनल पार्टी नेताओं की गाइडलाइन के हिसाब से तय कर दिए थे। टिकटों का बंटवारा तीन बैठकों के बाद हो गया था। इस बार अब तक एक बार चुनाव समिति की बैठक, दो बार कोर ग्रुप की बैठक और इसके बाद चार बार बड़े नेताओं के कोर ग्रुप में टिकटों को चर्चा हो चुकी है। गुरुवार रात्रि की बैठक भी शामिल कर लें तो तीन बार राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ अलग-अलग बैठकें हो चुकी हैं।

ज्यादा सिफारिशें बढ़ा रही हैं मुश्किलें

दक्षिणी हरियाणा की पांच सीटें ऐसी हैं जिनकी वजह से पांच अन्य सीटें और प्रभावित हो रही हैं। इन दस सीटों प्रत्याशियों की घोषणा दूसरे चरण की सूची में होगी। असल में ज्यादा सिफारिशें और राजनीतिक दबाव पार्टी कोर टीम की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक से पहले भी अध्यक्ष अमित शाह और सीएम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल सकते हैं।

चैंपियन अब भाजपा को बनाएंगे चैंपियन

वहीं, खेलों की दुनिया के चैंपियन अब राजनीति के चैंपियन बनने और हरियाणा भाजपा को चैंपियन बनाने की तैयारी में हैं। लोकसभा चुनाव में सभी दस सीटें जीतने वाली भाजपा इन खिलाडिय़ों की पहली पसंद बन चुकी है। चुनाव लड़कर विधानसभा में पहुंचने की इच्छा के कारण यह खिलाड़ी लगातार भाजपा का दामन थाम रहे हैं। अभी तक आधा दर्जन खिलाड़ी भाजपा से जुड़ चुके हैं और इतने ही खिलाड़ी भगवा रंग में रंगने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

लोकसभा चुनाव के दौरान रियो पैरा-ओलंपिक खेलों की पदक विजेता पद्मश्री दीपा मलिक के भाजपा में आने के बाद खिलाडिय़ों का कमल के फूल के प्रति लगाव बढ़ा है। हरियाणा की मनोहर सरकार ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव को खेल विश्वविद्यालय राई का चांसलर नियुक्त किया है। सरकार के इस फैसले ने भी खिलाडिय़ों को भाजपा के प्रति आकर्षित किया है। 

चुनाव लडऩे के इच्छुक इन खिलाडिय़ों को लगता है कि राजनीति में प्रवेश के जरिये वह विधानसभा में खेल व खिलाड़ियों की बात को दमदार तरीके से उठा सकते हैैं। दूसरा पहलू यह भी है कि खेलों में नाम और मुकाम हासिल कर चुके कुछ खिलाड़ी अब स्थायित्व चाहते हैैं। 

खिलाडिय़ों को 'स्टारडम' के सहारे विधानसभा चुनाव में टिकट मिलने और जीत का भरोसा इतना कि अच्छी खासी नौकरी भी छोडऩे से परहेज नहीं है। पुलिस की नौकरी छोड़कर अंतरराष्ट्रीय पहलवान बबीता फौगाट पहले ही भाजपा में शामिल हो चुकी हैं। उनके पिता द्रोणाचार्य अवार्डी महावीर फौगाट व बबीता फौगाट शुरू में जननायक जनता पार्टी में थे, लेकिन दोनों अब भाजपा में शामिल हो चुके हैैं। 

बबीता फौगाट को बाढड़ा से चुनाव लड़ाने की तैयारी है, लेकिन वहां भाजपा के मौजूदा विधायक सुखविंद्र मांढ़ी हैैं। पार्टी उनका टिकट नहीं काटना चाहती। लिहाजा बबीता के लिए दादरी में संभावनाएं तलाशी जा रही हैैं। टिकट के लिए दावेदारी ठोक रहे ओलंपियन पहलवान योगेश्वर दत्त भी भाजपा का दामन थाम चुके हैं। लोकसभा चुनाव में भी उनके भाजपा में शामिल होने की प्रबल संभावना थी, लेकिन तब बात नहीं बनी। 

हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष सुभाष बराला ने हालांकि स्पष्ट किया है कि पार्टी में आने वाले किसी भी व्यक्ति का टिकट तय नहीं है, लेकिन माना जा रहा कि वही लोग पार्टी में शामिल हो रहे हैैं, जिन्हें टिकट के संकेत मिल रहे हैैं। योगेश्वर दत्त टिकट का भरोसा मिलते ही डीएसपी की नौकरी छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैैं। 

पहलवान योगेश्वर के दांव से हुड्डा को बदलनी पड़ेगी रणनीति 

अंतरराष्ट्रीय पहलवान योगेश्वर दत्त सोनीपत जिले की बरौदा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैैं। बरौदा से फिलहाल कांग्र्रेस विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा हैैं। पूर्व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा यदि अपने पिता भूपेंद्र हुड्डा की परंपरागत गढ़ी सांपला किलोई सीट से चुनाव लड़े तो हुड्डा के लिए बरौदा को सेफ माना गया, लेकिन योगेश्वर के भाजपा के टिकट पर लडऩे की स्थिति में अब हुड्डा को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है। यह भी संभव है कि हुड्डा गढ़ी सांपला किलोई से ही चुनाव लड़ें और दीपेंद्र के लिए कोई दूसरी सेफ सीट देखें। 

हाकी कप्तान रह चुके संदीप सिंह पिहोवा में बनेंगे भाजपा के तारणहार 

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और पेनल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ संदीप सिंह भी भगवा पटका पहन चुके हैं। भाजपा उन्हें पिहोवा हलके से चुनाव मैदान में उतार सकती है। संदीप सिंह मूल रूप से कुरुक्षेत्र जिले के रहने वाले हैं। भाजपा के पास पिहोवा में कोई मजबूत उम्मीदवार नहीं था। इस सीट को सिख बाहुल्य माना जाता है। संदीप के लिए असंध में भी विकल्प है। 

पूर्व क्रिकेटर चेतन शर्मा और संजय भारद्वाज भी मांग रहे टिकट 

दिल्ली में भाजपा के टिकट पर गौतम गंभीर के संसद पहुंचने के बाद से हरियाणा में पूर्व टेस्ट क्रिकेटर चेतन शर्मा विधानसभा के लिए टिकट की दावेदारी ठोक रहे हैं। चेतन शर्मा फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र की किसी सीट से चुनाव लडऩा चाहते हैैं। हरियाणा फुटबाल संघ के अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू तथा द्रोणाचार्य अवॉर्डी एवं क्रिकेट कोच संजय भारद्वाज भी टिकट चाहते हैैं। 

कपिल देव को चांसलर बनाने से खिलाडिय़ों में बढ़ा भाजपा प्रेम

खेल मंत्री अनिल विज की पेशकश पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने टीम इंडिया के पूर्व कप्तान कपिल देव को खेल विश्वविद्यालय राई का कुलाधिपति बनाया है। पूर्व क्रिकेटर की ताजपोशी के बाद से खिलाडिय़ों में भाजपा के प्रति अधिक प्रेम जागा है। मौजूदा माहौल को देख कई खिलाड़ी भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं ताकि पूरे सम्मान के साथ पार्टी में एंट्री मार सकें। टिकट मिल गया तो ठीक, अन्यथा बाद में सरकार उन्हें किसी अहम पद पर एडजस्ट कर सकती है। 

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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