चंडीगढ़ [अनुराग अग्रवाल]। हरियाणा की 14वीं विधानसभा के लिए हुए चुनाव इस बार बिना किसी बड़े मुद्दों के लड़े गए। भाजपा ने जहां राष्ट्रीयता के मुद्दे पर जनसमर्थन हासिल करने की कोशिश की, वहीं कांग्रेस ने भाजपा की पांच साल की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाए। करीब 11 माह पहले अस्तित्व में आई जननायक जनता पार्टी ने भाजपा अथवा कांग्रेस को छेड़ने के बजाय अपनी खुद की पार्टी के एजेंडे पर चुनाव लड़ा।

प्रदेश के 1169 उम्मीदवारों की किस्मत अब इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में बंद हो गई। 24 अक्टूबर को सुबह सात बजे से मतगणना का दौर शुरू होगा और दोपहर करीब एक बजे तक अधिकतर रुझान पता चल जाएंगे। विभिन्न सर्वे और एक्जिट पोल राज्य में भाजपा की एकतरफा सरकार बनने की ओर इशारा कर रहे हैैं। भाजपा इस एक्जिट पोल से काफी हद तक सहमत है, जबकि कांग्रेस, इनेलो और जजपा ने इन्हें सिरे से खारिज कर दिया है। एक्जिट पोल के नतीजों को यदि नजर अंदाज भी कर दिया जाए तो विधानसभा चुनाव के नतीजे काफी चौंकाने वाले होंगे।

हरियाणा के चुनावी रण में भाजपा ने 75 से अधिक विधानसभा सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित कर रखा है। भाजपा भले ही इस लक्ष्य को हासिल न कर पाए, लेकिन इसके आसपास रहकर बिना किसी बाहरी सहयोग के सरकार बनाने की स्थिति में है। भाजपा के कई दिग्गजों की सीटें फंसी हुई नजर आ रही हैैं, लेकिन जिस तरह से मतदान का प्रतिशत 61 से बढ़कर 69 तक पहुंच गया, उसके मद्देनजर भाजपा की फंसी हुई सीटों के निकलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

भाजपा के कुछ दिग्गजों का फंसा पेच

करनाल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल की निर्विवाद एकतरफा जीत है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला की टोहाना में सीट फंसी हुई मानी जा रही है। बादली में कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ और नारनौंद में वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, आदमपुर में सोनाली फौगाट, महेंद्रगढ़ में शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा, शाहबाद में राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी और इसराना में परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार की सीट पर कांटे का मुकाबला है। मतदान प्रतिशत बढऩे के बाद इनमें से कुछ सीटों पर स्थिति भाजपा के पक्ष में बदली हुई नजर आ सकती है और कुछ पर नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कांग्रेस दिग्गजों की मुश्किलें भी कम नहीं

कांग्र्रेस में कैथल में रणदीप सिंह सुरजेवाला, रेवाड़ी में कैप्टन अजय यादव के बेटे चिरंजीव राव और तोशाम में किरण चौधरी का चुनाव फंसा हुआ है। यहां चुनाव नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैैं। थानेसर में इनेलो छोड़कर कांग्र्रेस में आए अशोक अरोड़ा व भाजपा के सुभाष सुधा के बीच कांटे की टक्कर है। गन्नौर में कांग्र्रेस के पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा चुनावी आकलन बदल सकते हैैं। गढ़ी सांपला किलोई में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पक्ष में माहौल बताया जाता है।

जजपा खुद को स्थापित करेगी इस बार

उचाना में जजपा संयोजक दुष्यंत सिंह चौटाला और पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता की भाजपा के टिकट पर टक्कर है। इस सीट का नतीजा चौंकाने वाला होगा। करीब दो दर्जन सीटें ऐसी हैैं, जहां दुष्यंत चौटाला की पार्टी के उम्मीदवार कड़े मुकाबले में हैैं। जजपा इस बार के चुनाव में खुद को स्थापित करने में कामयाब रहने वाली है। शाहाबाद में जजपा प्रत्याशी मजबूत स्थिति में है।

क्षेत्रीय दलों के दिग्गज भी जीत के भरोसे

इनेलो विधायक दल के नेता रहे अभय सिंह चौटाला की ऐलनाबाद में भाजपा के पवन बैनीवाल से टक्कर है। यहां का रिजल्ट काफी चौंकाने वाला होगा। सिरसा में हलोपा अध्यक्ष गोपाल कांडा चुनाव लड़ रहे हैैं, जबकि गोहाना में पूर्व सांसद राजकुमार सैनी अपनी लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के टिकट पर मैदान में हैैं। इन दोनों सीटों के चुनाव नतीजों पर भी सभी की निगाह टिकी है। 

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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