चंडीगढ़ [अनुराग अग्रवाल]। केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत, सोनीपत के सांसद रमेश कौशिक और भिवानी-महेंद्रगढ़ के सांसद चौ. धर्मवीर.. इन तीनों को भाजपा में प्रेशर की पालिटिक्स करने वाले ग्रुप के तौर पर लिया जाता है। तीनों की गिनती भाजपा के दिग्गज नेताओं में होती है और तीनों कांग्रेस की पृष्ठभूमि वाले हैं। इन नेताओं की आत्मा में भाजपा अब जाकर रची-बसी। फिर भी कुछ लोगों को शक है।

भाजपा में रहते हुए यह ग्रुप जिस तरह से प्रेशर पालिटिक्स करता है, उसे देखकर पुराने भाजपाइयों को लगता है कि कांग्रेस कल्चर के जीवाणु पूरी तरह से साफ नहीं हुए। चौ. बीरेंद्र सिंह के बारे में भाजपाइयों की धारणा कुछ अलग तरह की है। जींद रैली में मंच से खुद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मान लिया कि बीरेंद्र सिंह पर भगवा रंग पूरी तरह से चढ़ चुका। उन लोगों को भाजपा को अपने भीतर तक जल्द से जल्द आत्मसात कर लेने की जरूरत है, जो नए-नए भाजपा में आ रहे हैं।

भाजपा अध्यक्ष का यह इशारा टिकट के तलबगार नए-नए भाजपाई बने उन नेताओं के लिए तो है ही, जो दूसरे दलों से छलांग लगा रहे हैं, उनके लिए भी है, जो बरसों से भाजपा में रहकर भाजपा को मौका मिलते ही आंखें दिखाने लगते हैं। टिकट मांगना हर किसी का अधिकार है, लेकिन आंखें दिखाकर टिकट मांगना भाजपा काा कल्चर नहीं है। केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत अपनी बेटी आरती राव के लिए थोड़ा नरम हुए हैं तो भिवानी-महेंद्रगढ़ के सांसद धर्मवीर ने अपने बेटे मोहित की टिकट के लिए किसी भी सीमा तक जाने का संकेत दे दिया।

शांत स्वभाव के चौधरी धर्मवीर बाहर से जितने शांत हैं, भीतर से उतने ही उग्र भी। उन्होंने 23 सितंबर को राव तुलाराम के सम्मान में भिवानी में कार्यक्रम का ऐलान कर भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी। वह भी उस स्थिति में, जब इस कार्यक्रम के लिए हाईकमान से कोई अनुमति नहीं ली गई। धर्मबीर बेटे की टिकट के लिए अपनी राजनीतिक ताकत दिखाएंगे। ऐसा राव इंद्रजीत बेटी के लिए कई बार कर चुके। सोनीपत के सांसद रमेश कौशिक अपने भाई देवेंद्र कौशिक के लिए गन्नौर से टिकट चाहते हैं, लेकिन धीरे-धीरे वह निर्मल चौधरी के प्रति नरम रुख अख्तियार कर रहे हैं। दिल में भाई की टिकट की चाह छिपी है।

भाजपा में सिर्फ यही तीन सांसद ऐसे नहीं हैं, जो परिवार के लिए टिकट की पैरवी कर रहे। पांच सांसद बृजेंद्र सिंह, अरविंद शर्मा, रतनलाल कटारिया, कृष्णपाल गुर्जर और नायब सिंह सैनी भी चाहते हैं कि उनके परिवार के सदस्यों का बेड़ा पार हो जाए, लेकिन इन सांसदों को प्रेशर पालिटिक्स वाले ग्रुप का हिस्सा नहीं माना जाता।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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