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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 07, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Haryana Election 2024: हरियाणा में गठबंधन के फॉर्मूले पर उलझी कांग्रेस और आप, शहरी सीटों को लेकर फंसा पेच

Published: Sat, 07 Sep 2024 05:45 AM (IST)

हरियाणा में कांग्रेस और आप भले ही भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ने को तैयार है लेकिन दोनों के ...और पढ़ें

हरियाणा में गठबंधन के फॉर्मूले पर उलझी कांग्रेस और आप
हरियाणा में गठबंधन के फॉर्मूले पर उलझी कांग्रेस और आप

HighLights

  1. शहरी क्षेत्रों में भाजपा मजबूत, कांग्रेस नहीं लेना चाहती कोई रिस्क
  2. सीटों पर तालमेल को लेकर कांग्रेस व आप नेताओं के बीच बैठक हुई

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। हरियाणा में कांग्रेस और आप भले ही भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ने को तैयार है लेकिन दोनों के बीच सीटों को लेकर तालमेल नहीं बन पा रहा है। यही वजह है कि दोनों दलों के बीच गठबंधन का पेच अभी भी फंसा हुआ है। हालांकि दोनों ही दल अभी भी गठबंधन को लेकर आशान्वित है। दोनों ने इस पर जल्द ही सहमति के संकेत दिए है।

कांग्रेस व आप नेताओं के बीच बैठक हुई

शुक्रवार को भी सीटों पर तालमेल को लेकर कांग्रेस व आप नेताओं के बीच बैठक हुई है, लेकिन बाकी बैठकों की तरह इनमें भी कोई सहमति नहीं बन पायी। इस बीच कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति ने शुक्रवार शाम को फिर से हरियाणा में प्रत्याशियों के चयन को लेकर अहम बैठक की है। जिसमें सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे सहित पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

सूत्रों की मानें तो बैठक में करीब 71 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम फाइनल किए गए है। जिनकी घोषणा कभी भी हो सकती है। वैसे भी राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया पांच सितंबर से ही शुरू हो चुकी है। नामांकन की अंतिम तारीख 12 सितंबर तक है।

सूत्रों की मानें तो पार्टी अपने प्रत्याशियों के नामों में देरी इसलिए भी कर रही है ताकि टिकट वितरण से नाराज लोगों को नामांकन करने के लिए ज्यादा मौका न मिल सकें।

गठबंधन में दो अहम पेच फंसे

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस और आप के बीच गठबंधन में जो दो अहम पेच फंसे हुए है, उनमें पहला यह है कि आप राज्य में सात सीटों की मांग कर रही है, जबकि कांग्रेस उन्हें तीन-चार से ज्यादा देने को तैयार नहीं है।

शहरी क्षेत्रों में भाजपा मजबूत

दूसरा पेंच यह है कि कांग्रेस उन्हें शहरी क्षेत्रों की सीटें ऑफर कर रही है, जो आप नहीं चाह रही है। वजह शहरी क्षेत्रों में भाजपा की मजबूती है। जिसके चलते आप इन सीटों को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है। वह चाहती है कि उन्हें जो सीटें दी जाए, जहां जीत पक्की हो।