चंडीगढ़, जेएनएन।  हरियाणा में  चौटाला परिवार के बीच मतभेदों के चलते अस्तित्व में आई जननायक जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच राजनीतिक दोस्ती एक माह भी नहीं चल सकी।  सीटों के बंटवारे में भेदभाव का आरोप लगाते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने शुक्रवार देर रात  जननायक जनता पार्टी के साथ गठबंधन तोड़ने का एलान कर दिया। बसपा सुप्रीमो ने लखनऊ में हरियाणा के पार्टी पदाधिकारियों के साथ दो चरण की मैराथन बैठक के बाद रात दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व वाली जननायक जनता पार्टी के साथ गठबंधन तोड़ने का ऐलान किया।

एक माह में ही बिदका मायावती का हाथी, दुष्यंत चौटाला से गठबंधन टूटा 

मायावती ने घोषणा की है कि बसपा विधानसभा चुनाव में किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और अपने बलबूते पर राज्य की सभी 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। कयास लगाए जा रहे थे कि जजपा के साथ गठबंधन टूटने के बाद बसपा और कांग्रेस का गठबंधन हो सकता है, लेकिन मायावती ने स्पष्ट कर दिया कि हाल फिलहाल वह कांग्रेस के साथ नहीं जा रही है।

ट्वीट कर दी गठबंधन तोड़ने की जानकारी, अकेले चुनाव लड़ेगी बसपा

सपा और जननायक जनता पार्टी के बीच गठबंधन पूरे 1 माह भी नहीं चला। पिछले महीने 11 अगस्त को दुष्यंत चौटाला और सतीश मिश्रा ने दोनों दोनों दलों के बीच गठबंधन का एलान किया था। हरियाणा में पिछले 5 साल के दौरान बसपा का जननायक जनता पार्टी के साथ यह तीसरा गठबंधन था। इससे पहले बसपा राज्य में अभय सिंह चौटाला के नेतृत्व वाली इनेलो और फिर पूर्व सांसद राजकुमार सैनी के नेतृत्व वाली लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के साथ गठबंधन कर चुकी है।

मायावती ने लगाया दुष्यंत चौटाला पर सीटों के बंटवारे में गड़बड़ी का आरोप

2014 चुनाव के दौरान बसपा का कुलदीप बिश्नोई के नेतृत्व वाली हरियाणा जनहित कांग्रेस के साथ भी गठबंधन रहा है। हरियाणा जनहित कांग्रेस से पहले बसपा 1998 में ओमप्रकाश चौटाला के नेतृत्व वाली इनेलो के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ चुकी है। हरियाणा में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बसपा और जज्बा का गठबंधन टूटने के बाद जजपा नेता सकते में है। गठबंधन के बाद दुष्यंत चौटाला ने ऐलान किया था कि मायावती के हाथी पर बैठकर जजपा चंडीगढ़ में सत्ता की चाबी से राज का दरबार  खोलेगी।

मायावती को मिला था दुष्यंत के भाजपा के संपर्क में होने का फीडबैक

बसपा सुप्रीमो मायावती हालांकि गठबंधन टूटने के पीछे सीटों के गलत बंटवारे को कारण बता रही है लेकिन हरियाणा के बसपा नेताओं ने मायावती को यह फीडबैक दिया कि जननायक जनता पार्टी के नेता सत्तारूढ़ भाजपा के संपर्क में थे, जिस कारण गठबंधन तोड़ने की सिफारिश की गई। मायावती ने कहा कि हरियाणा के बसपा नेताओं की सिफारिश पर चर्चा के बाद या गठबंधन तोड़ा गया है।

अब हुड्डा करेंगे मायावती के साथ दोस्ती का प्रयास

हरियाणा में कांग्रेस का नेतृत्व परिवर्तन होने के बाद आप कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्य में बसपा और कांग्रेस के बीच नया गठबंधन हो सकता है लेकिन मायावती किसी तरह के गठबंधन से इंकार कर चुकी है। सूत्रों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा अब इस कोशिश में रहेंगे कि बसपा के साथ कांग्रेस का गठजोड़ हो जाए।

बसपा और मायावती का गठबंधन टूटना स्वाभाविक :जवाहर यादव

"पहले बसपा और इनेलो का गठबंधन टूटा और अब बसपा और जजपा का गठबंधन टूटा। ये दोनों गठबंधन टूटने स्वाभाविक थे क्योंकि मायावती ने 25 अक्टूबर 2002 में दलितों पर अत्याचार को लेकर चौटाला सरकार और उनके नेताओं को जिम्मेदार ठहराया था। नेता मतलब अजय चौटाला और अभय चौटाला।

                                                                                 - जवाहर यादव, पूर्व ओएसडी, मुख्यमंत्री, हरियाणा

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"बीएसपी एक राष्ट्रीय पार्टी है जिसके हिसाब से हरियाणा में होने वाले विधानसभा आमचुनाव में  दुष्यंत चैटाला की पार्टी से जो समझौता किया था वह सीटों की संख्या व उसके आपसी बंटवारे के मामले में उनके अनुचित रवैये के कारण इसे बीएसपी हरियाणा यूनिट के सुझाव पर आज समाप्त कर दिया गया है।ऐसी स्थिति में पार्टी हाईकमान ने यह फैसला किया है कि हरियाणा प्रदेश में शीघ्र ही होने वाले विधानसभा आमचुनाव में अकेले ही अपनी पूरी तैयारी के साथ सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

                                                            -  मायावती राष्ट्रीय अध्यक्ष बहुजन समाज पार्टी

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 चाचा अभय से आगे निकलने के भतीजे दुष्यंत के अरमानों को लगा धक्का

हरियाणा में 1998 में इनेलो-बसपा का पहला गठबंधन हुआ था। तब दोनों ने लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ा था। इनेलो ने चार और बसपा ने एक सीट जीती थी। इस बार फिर इनेलो बसपा का गठबंधन हुआ लेकिन अभय चौटाला से गठबंधन टूटने के बाद भतीजे दुष्यंत चौटाला ने चाचा से आगे निकलने की कोशिश की मगर बसपा से गठबंधन टूटने के बाद उनके अरमान पूरे नहीं हो पाए।

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"जननायक जनता पार्टी ने बसपा, उनके नेतृत्व, कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों को ताकत देने में यकीन किया और बसपा को 40 सीटों का प्रस्ताव रखा। हमारी इच्छा बहुजन समाज को राजनीतिक ताकत देने की रही और हम इसे आगे भी हमेशा जारी रखेंगे। जेजेपी शुरू से ही प्रदेश की सभी सीटों पर अपने संगठन को मजबूत कर रही है और अपने कर्मठ निष्ठावान कार्यकर्ताओं के दम पर सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी तथा किसान- कमरों की सरकार बनाएगी।

                                                                          - दुष्यंत सिंह चौटाला, संयोजक, जननायक जनता पार्टी

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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