नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। Delhi Election 2020:  झारखंड व महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में सत्ता से बेदखल हुई भाजपा के लिए दिल्ली विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। इस चुनाव को जीतकर पार्टी न सिर्फ 21 वर्षों के बाद दिल्ली की सत्ता में वापसी करने को आतुर है, बल्कि राज्यों में मिल रही पराजय पर विराम लगाकर विरोधी पार्टियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बनाना चाहती है। भारतीय जनता पार्टी के लिए यह चुनाव कितना महत्वपूर्ण है? इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा खुद मैदान में उतर गए हैं।

पिछले वर्ष भाजपा के हाथ से मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य निकल गए। लोकसभा चुनाव में पार्टी को बड़ी जीत जरूर मिली, लेकिन राज्यों में पराजय का सिलसिला नहीं थमा। महाराष्ट्र में सहयोगी दल शिवसेना ने कांग्रेस व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सहयोग से भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया। पार्टी को हरियाणा में भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिला और जननायक जनता पार्टी को सत्ता में साझीदार बनाना पड़ा। उसके बाद झारखंड में पार्टी को पराजय का सामना करना पड़ा है।

दिल्ली आसान नहीं BJP के लिए जीत

लगातार मिल रही पराजय के बीच पार्टी दिल्ली में उतरी है और यह भी चुनाव आसान नहीं है। पिछले विधानसभा चुनाव में 67 सीटें जीतकर आप सत्ता में आई थी। आप के पास मुख्यमंत्री अर¨वद केजरीवाल जैसा चेहरा है और सरकार की मुफ्त बिजली-पानी व महिला बस यात्र जैसी लोकलुभावन योजनाओं के सहारे वह सत्ता पर कब्जा बरकरार रखने की कोशिश में है। भाजपा इस सच्चाई से वाकिफ है और वह किसी भी सूरत में इस चुनाव में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती है।

लोगों को बता रहे कांग्रेस-AAP की सच्चाई : मनोज तिवारी

मनोज तिवारी दिल्ली (प्रदेश भाजपा अध्यक्ष) के मुताबिक, पार्टी चुनावी बैठकों के जरिये जनता तक अपनी बात पहुंचा रही है। लोगों को नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियां बताने के साथ ही आप व कांग्रेस की सच्चाई भी बताई जा रही है। शीर्ष नेतृत्व के साथ ही प्रत्येक कार्यकर्ता लोगों के बीच पहुंच रहा है। 

अमित शाह ने कार्यकर्ता के घर खाया खाना

तीन विधानसभा क्षेत्रों में जनसभा के बाद अमित शाह और मनोज तिवारी यमुना विहार के सी-5 ब्लॉक में पहुंचे। यहां यमुना विहार मंडल के महामंत्री मनोज कुमार का घर है। दोनों नेताओं ने उनके घर में ही खाना खाया।

15 हजार चुनावी सभाएं किए जाने का भाजपा का लक्ष्य

चुनावी सभाओं को संबोधित करने के साथ ही दोनों नेता रात में दिल्ली के नेताओं के साथ बैठक करके दिनभर की चुनावी गतिविधियों की समीक्षा करते हैं। अगले दिन की रणनीति भी तय की जाती है। शाह ने बड़ी रैलियों के बजाय नुक्कड़ सभाएं करके अपनी बात लोगों तक पहुंचाने की रणनीति बनाई है। दिल्ली में 15 हजार चुनावी सभाएं करने का लक्ष्य है। 2015 के चुनाव में भी सांसदों की पांच सौ बैठकें आयोजित की गई थीं, लेकिन शाह या अन्य बड़े नेता इस तरह से चुनाव प्रचार में शामिल नहीं हुए थे।

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