नई दिल्ली, जेएनएन। Delhi assembly Election 2020 : दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 की तैयारी में जुटी अध्यक्ष विहीन दिल्ली कांग्रेस में अंतर्कलह बेहद तीखी और व्यक्तिगत हो गई है। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शीला दीक्षित के बेटे और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने दिल्ली कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको को कानूनी नोटिस भेजकर उन्हें अपनी मां की मौत का जिम्मेदार ठहराया है। संदीप ने आरोप लगाया है कि चाको के मानसिक उत्पीड़न से उनकी मां का निधन हुआ है।

शीला दीक्षित के बेटे ने पीसी चाको को भेजा कानूनी नोटिस

शीला दीक्षित के निधन के करीब ढाई महीने बाद उनकी मौत के कारण ने कांग्रेस की अंदरुनी गुटबाजी को आरपार की लड़ाई बना डाला है। संदीप दीक्षित ने भेजे गए नोटिस में मांग की है कि शीला को दिए गए मानसिक उत्पीड़न के लिए चाको माफी मांगे या फिर कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

कहा-मुझसे माफी मांगें या मैं पुलिस में शिकायत दर्ज कराऊंगा

इतना ही नहीं शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित ने यह भी कहा है कि पीसी चाको के माफी नहीं मांगने की सूरत में चाको के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की भी बात कानूनी नोटिस में लिखी है।

गौरतलब है कि शीला दीक्षित की मौत के बाद कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे उनके कथित पत्र का जिक्र भी राजनीतिक गलियारों में होता आया है। हालांकि, शीला का लिखा गया वह कथित आखिरी पत्र अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। अपने पत्र में शीला दीक्षित ने सोनिया गांधी से पार्टी के अंदर चल रही अंदरुनी गुटबाजी पर दुख जताते हुए परेशानी का सबब करार दिया था।

शीला ने आरोप लगाया था कि प्रभारी पीसी चाको किसी वरिष्ठ नेता के इशारे पर कांग्रेस को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। शीला के आखिरी दिनों में उनके मानसिक तौर पर परेशान रहने की बात बेटे संदीप दीक्षित सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं। संदीप दीक्षित ने शीला की मौत के बाद यह बयान भी दिया था कि पार्टी में कुछ लोग ओछी हरकतें कर रहे हैं, जिसका नुकसान भी हुआ। शीला दीक्षित ने मौत से पहले सभी ब्लॉक कमेटियों को भंग करने, तीनों कार्यकारी अध्यक्षों के कार्यभार में फेरबदल और सभी 280 ब्लॉक में आब्जर्वर नियुक्त करने का अहम फैसला लिया था।

शीला दीक्षित का यह फैसला लोकसभा चुनाव की हार पर समीक्षा कमेटी की सिफारिश के आधार पर लिया था। शीला दीक्षित के इन अहम फैसलों को प्रभारी पीसी चाको ने अमल में लाने से इन्कार कर दिया था। चाको के फैसले के समर्थन में दो कार्यकारी अध्यक्ष हारून यूसुफ और देवेंद्र यादव नहीं थे। शीला दीक्षित का फैसला पलटने के बाद ही चाको और उनके बीच गहरा गतिरोध सार्वजनिक हो गया था।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, संदीप दीक्षित के कानूनी नोटिस के बाद पहले से ही वेंटिलेटर पर पड़ी दिल्ली कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। पार्टी की अंदरुनी गुटबाजी पर दखल देते हुए आलाकमान ने सख्ती नहीं दिखाई तो प्रदेश कांग्रेस में बड़ी टूट की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

यहां पर बता दें कि 15 वर्षों तक लगातार दिल्ली पर बतौर मुख्यमंत्री राज करने वाली दिग्गज कांग्रेसी नेता शीला  दक्षित का इसी साल 20 जुलाई को निधन हो गया था। वह केंद्रीय मंत्री रहने के साथ केरल की राज्यपाल भी रही थीं।

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Posted By: JP Yadav

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