राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। मंगलवार का दिन प्रत्याशियों के साथ ही पार्टियों व उसके पदाधिकारियों के लिए भी बेहद अहम है। दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी की अध्यक्षता में पार्टी नगर निगम के बाद लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल की है।

यदि भाजपा सत्ता हासिल करने में सफल रहती है तो निश्चित रूप से पार्टी और दिल्ली की सियासत में तिवारी का कद बढ़ेगा। इसके विपरीत पार्टी को हार मिलने पर वह विरोधियों के निशाने पर आ जाएंगे। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद नगर निगम की सत्ता में वापसी तिवारी के सामने बड़ी चुनौती थी जिसमें वह सफल रहे थे।

दिल्ली में लोकसभा चुनाव भी तिवारी के नेतृत्व में लड़ा गया

लोकसभा चुनाव भी पार्टी उनके नेतृत्व में लड़ी थी और सातों सीटों पर दोबारा भाजपा प्रत्याशियों को बड़ी जीत मिली थी। वह खुद उत्तर-पूर्वी दिल्ली से पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित व आप नेता दिलीप पांडेय को पराजित कर दूसरी बार लोकसभा पहुंचे थे। पार्टी उनके नेतृत्व में ही विधानसभा चुनाव भी लड़ी है जिसका परिणाम मंगलवार को सामने आएगा।

तमाम एक्जिट पोल के अनुमान को खारिज

करते हुए प्रदेश अध्यक्ष जीत का दावा कर रहे हैं। यदि पार्टी 21 वर्षो का वनवास खत्म करने में सफल रहती है तो तिवारी का सियासी रुतबा बढ़ेगा। आने वाले दिनों में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। वहीं, पराजय की स्थिति में उनकी परेशानी बढ़ेगी। विरोधियों के हमले तेज होंगे और दिल्ली की कमान किसी और नेता को सौंपने की मांग भी तेज हो जाएगी।

वहीं, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने मतगणना की तैयारी पूरी कर ली है। आज सुबह आठ बजे से मतों की गिनती का काम शुरू होगा। दोपहर 12 से एक बजे तक यह स्पष्ट हो जाएगा कि दिल्ली में किस दल की सरकार बनेगी, लेकिन नतीजे शाम तक घोषित होने की उम्मीद है।

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Posted By: Dhyanendra Singh

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