नई दिल्ली [संजय सलिल]। Delhi Election 2020:  चांदनी चौक संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाली शकूरबस्ती विधानसभा सीट के मतदाताओं का व्यवहार बदलता रहा है। ऐसा माना जाता है कि यहां के मतदाता राजनीतिक दलों की जगह प्रत्याशियों को ज्यादा तरजीह देते हैं। मैदान में मौजूद प्रत्याशियों में जो ज्यादा बेहतर होता है, मतदाता उसे ही चुनकर विधानसभा भेजते हैं। यही वजह है कि 2013 से पहले हुए चार चुनावों में यहां के मतदाताओं ने जहां भाजपा और कांग्रेस को दो-दो बार मौका दिया। वहीं 2013 में नई बनी पार्टी आप पर भरोसा जताया। ऐसे में इस बार मतदाताओं की नब्ज को कौन बेहतर तरीके से पकड़ता है यह तो 11 फरवरी को ही पता चलेगा, लेकिन इतना तय है कि मुकाबला फिर दिलचस्प देखने को मिल सकता है।

वर्ष 1993 में अस्तित्व में आए शकूर बस्ती विधानसभा सीट पर मौजूदा समय में दिल्ली के स्वास्थ्य व लोक निर्माण मंत्री सत्येंद्र जैन का कब्जा है। वह गत दो विधानसभा चुनावों से लगातार जीत दर्ज कर रहे हैं। ऐसे में यह सीट विधानसभा चुनाव के लिहाज से दिल्ली की हाईप्रोफाइल सीट मानी जा रही है। 1993 के पहले चुनाव में शकूरबस्ती सीट से भाजपा के गौरी शंकर भारद्वाज विधायक बने थे। उन्होंने कांग्रेस के कमलकांत शर्मा को सात हजार से अधिक मतों से पराजित किया था। लेकिन, पांच सालों के बाद वर्ष 1998 में हुए चुनाव में यहां की जनता ने कमल के फूल के बदले पंजे का दामन थाम लिया। इस चुनाव में भाजपा के गौरी शंकर भारद्वाज को कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. एससी वत्स के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में भी बतौर कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. एससी वत्स ने अपनी जीत को बरकरार रखा। उन्होंने भाजपा के नए प्रत्याशी श्याम लाल गर्ग को 14 हजार मतों से पीछे छोड़ दिया था।

लगातार 2 बार जीत हासिल कर चुकी है AAP

2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के श्याम लाल गर्ग ने अपनी हार का बदला ले लिया और उन्होंने तब के मौजूदा विधायक डा. वत्स को चार हजार मतों से पराजित कर दिया। वर्ष 1993 से वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव परिणामों के लिहाज से देखें तो इस सीट पर कांग्रेस व भाजपा के दो बार विधायक चुने गए। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में अन्ना आंदोलन की कोख से निकली AAP ने पहली बार दस्तक दी तो शकूरबस्ती के मतदाताओं ने मौजूदा मंत्री सत्येंद्र जैन को जिताकर विधानसभा भेज दिया। सत्येंद्र जैन ने तब भाजपा के तत्कालीन विधायक श्याम लाल गर्ग को सात हजार से अधिक मतों से हराया था। उनकी जीत का यह जलवा वर्ष 2015 के चुनाव में भी कायम रहा और वह दोबारा विधायक बनने में कामयाब रहे।

पंजा छोड़कर कमल का साथ वोटरों को नहीं आया रास

शकूरबस्ती सीट से दो बार विधायक रहे कांग्रेस के डा. एससी वत्स ने वर्ष 2015 में भाजपा का दामन थाम लिया था। भाजपा ने उन्हें पूर्व विधायक श्याम लाल गर्ग की जगह उतारा था। लेकिन मतदाताओं को उनका कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आना रास नहीं आया और उन्हें पराजय का मुंह देखना पड़ा। इस चुनाव में कांग्रेस के चमन लाल शर्मा उम्मीदवार थे।

Posted By: JP Yadav

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