नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। दिल्ली की राजनीति का बदलता चरित्र कहें अथवा यहां की आबादी में पूर्वी राज्यों के लोगों का बढ़ता अनुपात, लेकिन यहां की सियासी फिजा में पूर्वांचल के रंग गहरे होते जा रहे हैं। इस वर्ग के मतदाता की अनदेखी किसी भी पार्टी के लिए नामुमकिन हो गई है। आलम यह है कि आम आदमी पार्टी और भाजपा में जहां प्रदेश नेतृत्च की कमान ही पूर्वांचली नेताओं के हाथ है, वहीं कांग्रेस में भी प्रचार अभियान समिति की बागडोर पूर्वांचली को दी गई है।

1960 से अब तक हावी रहा पंजाबी नेतृत्व

1960 से अब तक दिल्ली में पंजाबी नेतृत्व सर्वाधिक असरदार रहा है। मदनलाल खुराना, विजय कुमार मल्होत्र व केदारनाथ साहनी यहां के सबसे मजबूत राजनीति चेहरे थे। कांग्रेस में जगप्रवेश चंद्र, मेहरचंद खन्ना, एचकेएल भगत, ललित माकन व जगदीश टाइटलर बड़े चेहरे थे। 1990 के बाद अजय माकन, कपिल सिब्बल व सुभाष चोपड़ा सरीखे नेताओं ने नेतृत्व संभाला। लेकिन राजधानी के राजनीतिक समीकरणों ने 2020 से पूर्वाचल मतदाताओं को महत्वपूर्ण भूमिका में स्वीकार करना शुरू कर दिया है। शायद इसीलिए सत्ताधारी आप ने 11, भाजपा ने 8 और कांग्रेस ने प्रत्यक्ष तौर पर तीन जबकि परोक्ष रूप से चार पूर्वाचली उम्मीदवारों को टिकट देकर बदलते राजनीतिक परिदृश्य को मजबूत पहचान दी है।

अनधिकृत कॉलोनियों में हैं ज्यादा पूर्वांचली

राजधानी की अनधिकृत कॉलोनियों में पूर्वाचली मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है। इन कॉलोनियों में उत्तर प्रदेश व बिहार के अलावा उत्तराखंड के लोग भी बड़ी संख्या में रहते हैं। बदरपुर, तुगलकाबाद, संगम विहार, देवली, अंबेडकर नगर, छतरपुर, त्रिलोकपुरी, कोंडली, पटपड़गंज, लक्ष्मीनगर, विश्वासनगर, कृष्णानगर, शाहदरा, सीमापुरी, रोहतास नगर, सीेलमुपर, घोंडा, मुस्तफाबाद, करावल नगर, मटियाला, विकासपुरी, उत्तम नगर, द्वारका, नजफगढ़, बुराड़ी, बादली, किराड़ी, नांगलोई, मादीपुर।

पूर्वांचल के लोगों ने दिल्ली में बनाई खास जगह : BJP

राजेश भाटिया (महामंत्री, प्रदेश भाजपा) के मुताबिक, दिल्ली में कभी पंजाबी और वैश्य समुदाय का ही ज्यादा बोलबाला था, लेकिन अपने व्यवहार और मेहनत से पूर्वांचल के लोगों ने भी अब यहां अमिट जगह बना ली है। वैसे भी दिल्ली ने हर किसी को अपना बनाया है, गले से लगाया है।

सम्मान देने के लिए किया राजद से गठबंधन : सुभाष चोपड़ा

सुभाष चोपड़ा (अध्यक्ष, दिल्ली कांग्रेस) के मुताबिक, दिल्ली में पूर्वांचल के लोग बड़ी तादाद में रहते हैं। दिल्ली को संवारने और इसे सुचारू ढंग से चलाने में उनका बड़ा योगदान है। इसी योगदान को सम्मान देने के लिए बिहार के प्रमुख सियासी दल राजद के साथ गठबंधन किया गया है। इससे पूर्वाचलियों को संदेश भी जाएगा कि कांग्रेस उन्हें लेकर कितनी संजीदा है।

1990 के बाद बढ़ने लगे पूर्वांचल के मतदाता

1990 के बाद दिल्ली में पूर्वाचली मतदाताओं की संख्या में वृद्धि होनी शुरू हुई। रोजगार की तलाश में लोग यहां आए एवं विभिन्न इलाकों में बसते गए। आज इनका दबदबा कितना बढ़ चुका है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी हैं तो कांग्रेस ने कीर्ति झा आजाद को प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया है। आम आदमी पार्टी ने संजय सिंह को राज्यसभा सदस्य, जबकि गोपाल राय को पार्टी का प्रदेश संयोजक बनाया है। भाजपा व कांग्रेस ने पूर्वाचली मतदाताओं पर सीधा प्रभाव रखने के उद्देश्य से ही घटक दलों का सहारा लिया है। भाजपा ने गठबंधन करते हुए जदयू को दो और लोजपा को एक सीट दी है, जबकि कांग्रेस ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को चार सीटें दी हैं।

AAP, भाजपा और कांग्रेस ने समीकरण का रखा ध्यान

भाजपा ने 2020 के विधानसभा चुनाव में मॉडल टाउन से कपिल मिश्रा, विकासपुरी से संजय सिंह, लक्ष्मी नगर से अभय वर्मा, बादली से विजय भगत, रिठाला से मनीष चौधरी, किराड़ी से अनिल झा, सीलमपुर से कौशल मिश्र तथा घोंडा से अजय महावर को टिकट दिया है। कांग्रेस ने संगम विहार से पूनम झा आजाद, रिठाला से प्रदीप पांडे और करावल नगर से अरबिंद सिंह को टिकट दिया है। साथ ही चार सीटें बुराड़ी, किराड़ी, उत्तम नगर व पालम राजद को दी हैं। इन सभी सीटों भी पर पूर्वांचली चेहरों को ही जगह मिली है। इसी क्रम में आप ने बुराड़ी से संजीव झा, तिमारपुर से दिलीप पांडे, किराड़ी से रितुराज झा, शालीमार बाग से वंदना कुमारी, त्रिनगर से प्रीति तोमर, मॉडल टाउन से अखिलेशपति त्रिपाठी, द्वारका से विनय मिश्र, मालवीय नगर से सोमनाथ भारती, रोहतास नगर से सरिता सिंह, बाबरपुर से गोपाल राय व करावल नगर से दुर्गेश पाठक को टिकट दिया है।

पूर्वांचल के लोगों का किया सम्मान : गोपाल

गोपाल राय (प्रदेश संयोजक, AAP) का कहना है कि पूर्वांचल के लोग आज दिल्ली के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सभी क्षेत्रों में खासी अहमियत रखते हैं, इसीलिए आम आदमी पार्टी ने हमेशा उनका सम्मान किया है और उनके दुख-सुख का भी ध्यान रखा है।

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Posted By: JP Yadav

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