नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने अनधिकृत कॉलोनी के संपत्ति मालिकों को बड़ी राहत देने का एलान किया है। निगम ने इन कॉलोनियों के संपत्ति मालिकों से बकाया संपत्ति कर न लेने की घोषणा की है। इससे करीब नौ लाख संपत्ति मालिकों को बकाया संपत्ति कर नहीं देना होगा। इस फैसले से दक्षिणी निगम पर करीब 1400 करोड़ का अतिरिक्त भार पढ़ेगा। निगम सदन की शुक्रवार को हुई बैठक में 2020-21 के बजट प्रस्तावों को पेश करते हुए स्थायी समिति अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने यह घोषणा की।

उनके अनुसार, इस फैसले से निगम इलाके में 925 अनधिकृत कॉलोनियों के नौ लाख परिवारों को लाभ होगा। गुप्ता ने बताया कि अनधिकृत कॉलोनियों में अब तक निगम फंड का उपयोग नहीं कर पाता था लेकिन केंद्र सरकार के फैसले के बाद दिल्ली के 40 लाख लोगों को अनधिकृत कॉलोनियों के नियमित होने का लाभ मिलेगा। हमने फैसला किया है कि इन कॉलोनियों के लोगों से वर्ष 2004 से 2018 तक का बकाया संपत्ति कर नहीं लेंगे। लोगों को वर्ष 2019-20 का बकाया संपत्ति कर देना होगा। स्थायी समिति अध्यक्ष ने बताया कि कॉलोनियों के नियमित होने के बाद से इनसे निगम को हर वर्ष करीब 100 करोड़ का संपत्ति कर आने का अनुमान है।

निगमायुक्त की ओर से प्रस्तावित कर वृद्धि खारिज

निगमायुक्त ने संपत्ति कर की दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव के साथ पेशेवर व संपत्ति कर के हस्तांतरण का शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था। इसे स्थायी समिति अध्यक्ष ने खारिज कर दिया है। भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि हमने विभागों से कहा है कि वह संपत्ति कर बढ़ाने की बजाय वर्तमान में इसे न देने वाले लोगों को कर के दायरे में लाए।

50 करोड़ रुपये विकास का रखा था फंड

दक्षिणी निगम ने इससे पूर्व अनधिकृत कालोनियों में विकास कार्य के लिए बजट में 50 करोड़ के बजट का प्रावधान किया था। इससे इन कालोनियों और शहरीकृत गांवों में विकास कार्य किए जा सकेंगे।

प्रस्ताव को लागू करने की यह होगी प्रक्रिया

स्थायी समिति के अध्यक्ष की ओर से बजट प्रस्तावों में घोषणा के बाद नेता सदन इसे अंतिम रूप देगी। इससे पूर्व नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस दल के नेता इस बजट प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे। इसके बाद नेता सदन कमलजीत सहरावत इसे अपने बजट प्रस्ताव में शामिल करेंगी। इसकी मंजूरी के बाद निगम की ओर से आदेश निकालने के बाद यह प्रस्ताव लागू हो जाएगा।

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