नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। विधानसभा चुनाव का रण सजने लगा है। भाजपा के अधिकतर सूरमा मैदान में आ गए हैं। मंगलवार को नामांकन पत्र भरने का अंतिम दिन है, जिसके बाद चुनावी लड़ाई में और तेजी आएगी। भाजपा इसे धार देने के लिए अपने दिग्गज नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। बूथ प्रबंधन में कहीं कोई खामी न रह जाए, इसके लिए कई राज्यों के संगठन महामंत्री दिल्ली में डेरा डालेंगे। इसके साथ ही कई केंद्रीय मंत्री व पूर्व मंत्रियों को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। इनकी निगरानी में चुनाव प्रचार अभियान को मजबूती के साथ चलाने की तैयारी है।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर को कई माह पहले ही दिल्ली का चुनाव प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ ही केंद्रीय राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी और नित्यानंद राय सह प्रभारी हैं। अब इनके सहयोग के लिए कई वरिष्ठ नेता दिल्ली के रण में उतरने वाले हैं। प्रत्येक नेताओं को एक-एक लोकसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी दी जाएगी। वह अपने लिए निर्धारित लोकसभा क्षेत्र में आने वाले सभी विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी गतिविधियों को आगे बढ़ाएंगे।

संगठन महामंत्रियों के अनुभव का उठाया जाएगा लाभ

बूथ प्रबंधन पर भाजपा का जोर है। लोकसभा चुनाव की तरह पार्टी ने इस विधानसभा चुनाव में भी ‘बूथ जीतो चुनाव जीतो’ का नारा दिया है। पिछले कई महीने से बूथ स्तरीय टीम गठित करने की कवायद चल रही थी। इस महीने के शुरू में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बूथ कार्यकर्ताओं को संबोधित किया था। अब बूथ प्रबंधन को और मजबूत करने के लिए हिमाचल प्रदेश के संगठन महामंत्री पवन राणा, हरियाणा के सुरेश भट्ट, मध्य प्रदेश के सुहास भगत और राजस्थान के संगठन महामंत्री चंद्रशेखर व महामंत्री भजन लाल शर्मा और उत्तर प्रदेश के महामंत्री गो¨वद शुक्ला को दिल्ली बुलाया जा रहा है। इनके संगठन कौशल का लाभ उठाया जाएगा।

मतदाताओं के बीच पहुंचेंगे मंत्री

नरेंद्र मोदी सरकार के कई मंत्री और पूर्व मंत्री भी दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी भूमिका निभाएंगे। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, गजेंद्र शेखावत, अनुराग ठाकुर, मनसुख लाल मंडाविया, पूर्व मंत्री राधा मोहन सिंह, मनोज सिन्हा सहित अन्य मंत्रियों को चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी दी जा रही है। प्रत्येक मंत्री व पूर्व मंत्री एक-एक लोकसभा में चुनाव प्रचार की रणनीति बनाएंगे। पार्टी ने दिल्ली में पांच हजार चुनावी सभाएं करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मंत्री व पूर्व मंत्री अपने संसदीय क्षेत्र की सीटों पर स्थानीय नेताओं के साथ विचार-विमर्श करके चुनावी कार्यक्रम तैयार करेंगे। जाति, क्षेत्र, धर्म व अन्य समीकरणों को ध्यान में रखकर सभाएं आयोजित होंगी ताकि प्रचार को धारदार बनाया जा सके।

Posted By: Mangal Yadav

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