बिलासपुर। चार दशक बाद यह पहली बार हुआ जब मंत्रिमंडल में बिलासपुर जिले को प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। अविभाजित मध्यप्रदेश के जमाने में हो या फिर राज्य निर्माण के बाद बिलासपुर जिले की पहचान कद्दावर मंत्रियों में होते रही है। पहली बार एक अदद मंत्री के लिए जिला तरस गया। अविभाजित मध्यप्रदेश के जमाने से लेकर वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले तक प्रदेश के मंत्रिमंडल में बिलासपुर जिले का राजनीतिक दबदबा भरपूर रहा है। मध्यप्रदेश के जमाने की राजनीतिक परिस्थितियों पर नजर डालें तो मंत्रिमंडल में जिले के कद्दावर मंत्रियों का दखल हमेशा से ही रहा है।

डॉ. श्रीधर मिश्रा से लेकर बीआर यादव,चित्रकांत जायसवाल,अशोक राव व बंशीलाल धृतलहरे । दिग्गज कांग्रेसी नेताओं की मौजूदगी मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल में हमेशा से रही है। जब तक ये राजनीति में सक्रिय रहे इनकी दमदार उपस्थिति रही।

पूर्व के दिग्गज नेताओं की खासियत रही है कि वे जिले की राजनीतिक तासीर और महत्व को समझते थे। यही कारण है कि बिलासपुर जिले से ही दो से लेकर तीन मंत्रियों की उपस्थिति हमेशा से ही रही है। इनकी प्रभावी मौजूदगी और विकास कार्य को गंभीरता के साथ कराने में भरोसा रखने के कारण अविभाजित मध्यप्रदेश के दौर में भी बिलासपुर की अपनी खास पहचान बनी थी।

दिग्गज कांग्रेसी मंत्री और बिलासपुर एक दूसरे के पूरक हुआ करते थे। मध्यप्रदेश से जब छत्तीसगढ़ का विभाजन हुआ तो बिलासपुर जिले का राजनीतिक कद तब और बढ़ गया जब कांग्रेस ने अजीत जोगी को मुख्यमंत्री बनाया।

प्रदेश की राजनीति में बिलासपुर उनके गृह जिले के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई । वहीं प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद बिलासपुर का सियासी दबदबा एक बार फिर उफान पर आ गया । भाजपा सरकार में जिले से तीन-तीन विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिली । अमर अग्रवाल,पुन्नूलाल मोहले और डॉ.कृष्णमूर्ति बांधी। वर्ष 2013 से 2018 तक जिले का राजनीतिक दबदबा कायम रहा। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में लहर के बीच प्रदेश से भाजपा का सुपड़ा साफ हो गया।

जिले का राजनीतिक समीकरण भी एकदम अलग हो गया। जिन दो सीटों पर कांग्रेस जीती वहां दोनों ही विधायक पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया अपनी सीट नहीं बचा पाए।

जाहिर है पहली बार चुनाव जीतकर विस पहुंचे दोनों ही विधायक मंत्री नहीं बन पाए । 40 साल के राजनीति के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब मंत्रिमंडल में जिले का प्रतिनिधित्व नजर नहीं आएगा।

इनकी वजह से सियासी रसूख बना

डॉ.श्रीधर मिश्रा, बीआर यादव, बंशीलाल धृतलहरे, चित्रकांत जायसवाल, अशोक राव, मूलचंद खंडेलवाल, अमर अग्रवाल, पुन्नूलाल मोहले व डॉ.कृष्णमूर्ति बांधी। राज्य निर्माण के बाद जिले का स्र्तबा तब और बढ़ गया था जब अजीत जोगी को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली । भाजपा सरकार में धरमलाल कौशिक को विधानसभाध्यक्ष बनने का गौरव भी हासिल हुआ।

Posted By: Sandeep Chourey

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