रायपुर। भूपेश बघेल का मंत्रिमंडल तैयार है। उम्मीद तो की जा रही थी कि नई सरकार के मंत्रिमंडल में लोकसभा चुनाव की तैयारी दिखेगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। लोकसभा चुनाव अप्रैल-मई में होने हैं। आमतौर पर छत्तीसगढ़ में पहले चरण में वोटिंग होती है यानी अप्रैल में वोट पड़ जाएंगे।

15 साल के बाद राज्य की सत्ता में काबिज होने के बाद कांग्रेस को उम्मीद है कि इस बार लोकसभा चुनाव में भी यहां पार्टी को सफलता मिलेगी। पिछले चुनाव यानी 2014 में राज्य की 11 में से मात्र एक सीट दुर्ग पर ही कांग्रेस कब्जा जमा पाई थी।

इस बार विधानसभा चुनाव में बंपर सफलता हासिल करने के बाद कांग्रेस भारी उत्साह में है। माना जा रहा था कि सरकार का हर निर्णय लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा लेकिन मंत्रिमंडल के गठन में लोकसभावार संतुलन का साफ अभाव दिख रहा है। भूपेश ने अपने मंत्रिमंडल सबसे ज्यादा छह मंत्री दुर्ग संभाग से रखे हैं। दुर्ग संभाग में लोकसभा की दो सीटें आती हैं-दुर्ग और राजनांदगांव। दुर्ग सीट पर कांग्रेस के ताम्रध्वज साहू जीते थे।

वे राज्य के इकलौती कांग्रेसी सांसद थे। इस बार वे विधानसभा में उतरे और अब राज्य सरकार में मंत्री हैं। राजनांदगांव सीट पर भाजपा का कब्जा है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह यहां से सांसद हैं। अब मंत्रिमंडल के समीकरणों को ध्यान दें तो दुर्ग संभाग की दो लोकसभा सीटों में राज्य सरकार के छह मंत्री हो गए हैं।

खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दुर्ग संभाग की पाटन विधानसभा सीट से चुने गए हैं। उनके अलावा सांसद ताम्रध्वज साहू अब मंत्री हैं, अनिला भेड़िया डौंडीलोहारा की विधायक हैं, मोहम्मद अकबर कवर्धा से तो रविंद्र चौबे साजा से हैं। मंत्री पद पाने वाले रूद्र गुरु अहिवारा से विधायक हैं। ये सभी दुर्ग संभाग से मंत्री बने हैं। दुर्ग संभाग की दो में से एक सीट पहले से कांग्रेस के पास रही फिर भी दुर्ग संभाग को मंत्रिपरिषद की आधी सीटें मिल गई हैं। दूसरी ओर अन्य संभागों को उतना महत्व नहीं मिला।

रूद्र गुरु इससे पहले रायपुर संभाग के आरंग से चुनाव लड़ते रहे जबकि सरकार के एक अन्य मंत्री डॉ. शिव डहरिया अहिवारा से। इस बार दोनों की सीटों की अदला बदली की गई और दोनों को ही मंत्री का पद दिया गया। शिव डहरिया रायपुर संभाग से अकेले मंत्री हैं हालांकि वे भी पहले दुर्ग की अहिवारा से ही पहचाने जाते रहे। रायपुर संभाग के कद्दावर नेताओं में शुमार सत्यनारायण शर्मा और धनेंद्र साहू को मंत्रिपरिषद में जगह नहीं मिल पाई। रायपुर संभाग मेें रायपुर और महासमुंद दो लोकसभा सीटें हैं।

बस्तर संभाग में लोकसभा की दो सीटें हैं और दोनों ही भाजपा के पास हैं। बस्तर से सिर्फ कवासी लखमा को मंत्री बनाया गया है। लखमा मध्य और दक्षिण बस्तर की राजनीति के बड़े चेहरे हैं पर कांकेर लोकसभा सीट जो उत्तर बस्तर में आती हैं वहां से कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। भानुप्रतापपुर के विधायक पूर्व मंत्री मनोज मंडावी के मंत्री बनने की चर्चा थी लेकिन उनका नाम कट गया।

बिलासपुर में सबसे ज्यादा सीट, दो मंत्री

लोकसभा सीटों की सबसे ज्यादा संख्या बिलासपुर संभाग में है। यहां चार सीटें हैं। बिलासपुर संभाग से दो मंत्री बनाए गए हैं। उमेश पटेल को पिता की विरासत के साथ ही युवा होने का भी लाभ मिला है। कोरबा के विधायक जयसिंह अग्रवाल भी जगह पाने में कामयाब रहे। इस संभाग की बिलासपुर, रायगढ़, जांजगीर चांपा, कोरबा सीटों पर इन मंत्रियों का असर देखा जाएगा।

उत्तर छत्तीसगढ़ में सिंहदेव के कद के भरोसे पार्टी

उत्तर छत्तीसगढ़ में अंबिकापुर सीट से विधायक टीएस सिंहदेव राज्य के सबसे कद्दावर मंत्री हैं। उन्हें नंबर टू माना जा रहा है। विधानसभा में सरगुजा संभाग की सभी 14 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा हो गया पर लोकसभा में सिंहदेव कितना असर डाल पाएंगे यह देखा जाना बाकी है। इस संभाग से सिंहदेव के अलावा कैबिनेट में प्रेमसाय सिंह टेकाम को जगह मिली है। यहां एक लोकसभा सीट पर दो मंत्री हैं जबकि राज्य के दूसरे आदिवासी संभाग बस्तर की दो सीटों पर एक मंत्री।  

Posted By: Hemant Upadhyay

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