नईदुनिया, रायपुर। कहा जाता है कि राजनीति में सब कुछ जायज है। यह बात यूं ही नहीं कही जाती। दिनभर मंचों पर एक दूसरे के विरुद्घ मोर्चा खोलने वाले नेता अक्सर अपने फैसले बड़ी होशियारी से लेते हैं। वह सांप तो मार देते हैं और लाठी भी नहीं टूटने पाती। छत्तीसगढ़ के चुनाव में भी कुछ ऐसे ही रोचक घटनाक्रम दिखाई देने लगे हैं। बात टिकटों के बंटवारे की करें तो दलों के सभी बड़े व कद्दावर नेता खुद को सेफ जोन में करते दिखाई देने लगे हैं।

अजीत जोगी ने राजनांदगांव से अपनी उम्मीदवारी वापस लेकर भाजपा प्रत्याशी मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की एक बाधा खत्म कर दी है। उन्होंने जहां यह कहते हुए दावेदारी वापस लिया था कि प्रदेश में गठबंधन के लिए प्रचार करेंगे वहीं तत्काल मरवाही से चुनाव लड़ने के संकेत देकर यह साबित कर दिया कि उन्होंने भी मिशन सेफ जोन के फार्मूले के तहत सीट बदल दी। जोगी जकांछ बसपा गठबंधन से सीएम पद के दावेदार हैं। ऐसे में यह तय हो गया था कि दो दलों में से एक का सीएम उम्मीदवार चुनावी रण में निश्चित ही हार जाएगा।

अजीत जोगी की घोषणा के बाद राजनांदगांव सीट और हाई प्रोफाइल हो गई थी। जोगी ने यह संकेत दिए कि वह दूसरे चरण में मरवाही से उम्मीदवारी करेंगे। इसके पीछे तर्क दिया कि मरवाही की जनता का दबाव है। उनके इस एलान के बाद यह आशंका और बलवती हुई कि सभी बड़े नेता चुनाव में एक दूसरी की सीट का ख्याल रखते हैं। अजीत जोगी के इस निर्णय व राज्य के कद्दावर नेताओं के विरुद्घ दूसरे दलों के उम्मीदवारों की प्रोफाइल देखी जाए तो यह बात खुद सिद्ध हो जाती है।

Posted By: Ravindra Pratap Sing

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