रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद आम आदमी को रोजगार की सबसे ज्यादा उम्मीद है। विधानसभा चुनाव में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के मतदाताओं ने रोजगार मिलने के भरोसे पर कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया और प्रदेश में लगातार तीन बार से चली आ रही भाजपा सरकार को बदल दिया।

एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म की ताजा रिपोर्ट को माने तो ग्रामीण क्षेत्र में 58 फीसदी और शहरी क्षेत्र में 61 फीसदी लोगों ने रोजगार के लिये वोट दिया है। प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने भी घोषणा पत्र में रोजगार के मुद्दे को प्राथमिकता दी है। अब प्रदेश में रोजगार के अवसर पैदा करना सबसे बड़ी चुनौती है।

प्रदेश में संविदा और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की बड़ी संख्या है। इन कर्मचारियों को सरकार से उम्मीद है कि उनको स्थायी नियुक्ति दी जाएगी। केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की पूर्व भाजपा सरकार ने स्कील डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू किया था।

भाजपा सरकार ने इसे रोजगार का अवसर बताकर जमकर प्रचार किया। लेकिन चुनाव में रोजगार के लिए प्रशिक्षण को सिर्फ छह फीसदी लोगों ने ही समर्थन किया। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, छह फीसदी मतदाताओं ने स्कील डेवलपमेंट के आधार पर मतदान किया है। प्रदेश में भाजपा सरकार ने स्कील डेवलपमेंट के बड़े-बड़े सेंटर खोले और स्वरोजगार के लिए लोगों को प्रोत्साहित भी किया, लेकिन इसका असर मतदान पर नहीं पड़ा।

शिक्षा और रोजगार में आरक्षण को सबसे कम प्राथमिकता

ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओं ने शिक्षा और रोजगार में आरक्षण को सबसे कम प्राथमिकता दी। प्रदेश के सिर्फ छह फीसदी वोटरों ने आरक्षण को आधार बनाकर मतदान किया। वोटरों का साफ मानना है कि सरकार को शिक्षा और रोजगार में आरक्षण की जगह बेहतर अवसर और रोजगार पैदा करना चाहिए।

 

Posted By: Hemant Upadhyay

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