रायपुर। छत्तीसगढ़ में बड़े बहुमत के साथ सरकार बनाने वाली कांग्रेस पार्टी में पहले मुख्यमंत्री पद के लिए पेंच फंसता नजर आया। एक पद के लिए चार दावेदार सामने आए और अंतत: भूपेश बघेल प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद मंत्रिमण्डल के गठन की बात आई। पार्टी के शीर्ष नेता और मंत्री टीएस सिंह देव अपने पसंद का विभाग न मिलने की बात से नाखुश हैं। अभी विभागों का बंटवारा नहीं हुआ है, लेकिन मंत्रियों से उनके पसंद के विभागों के विषय में जानकारी ली गई है। इनमें सभी 12 मंत्रियों ने अपनी रूचि के विभाग बताए हैं।

इसी के आधार पर एक प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव में टीएस सिंहदेव वित्त विभाग चाहते थे, लेकिन अब यह बात सामने आ रही है कि वित्त विभाग मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने पास रखना चाहते हैं।

प्रदेश में कांग्रेस से 68 विधायक जीत कर विधानसभा में आए हैं। 90 सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंत्रिमंडल के सदस्यों की संख्या अधिकतम 13 है। ऐसे में मंत्रिपद के लिए सही दावेदारों का चुनाव करना भी जटिल रहा।

मुख्यमंत्री सहित 12 मंत्रियों ने पिछले दिनों मंत्री पद की शपथ ली। इसमें भी एक मंत्री का पद अभी रिक्त रखा गया है। अब मंत्रियों को विभागों के बंटवारे की बात हो रही है। कांग्रेस में चुनाव कैंपेनिंग के दौरान ही आपसी सामंजस्य बनाकर चुनाव लड़ने की नीति शीर्ष नेताओं ने तय की थी और इसी के आधार पर पार्टी अब राज्य में अपनी सरकार बनाकर काम काज-शुरू करने जा रही है, लेकिन विभागों के बंटवारे को लेकर अभी यहां बड़ा पेंच फंसता नजर आ रहा है।

उधर राज्य में पांचवीं विधानसभा के गठन के बाद इसके पहले सत्र के लिए अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। मंत्रियों को विभाग के बंटवारे के बाद इस सत्र में विभागीय कार्यों के अनुमोदन की प्रक्रिया शुरू होगी और इसके साथ ही राज्य में सरकारी मशीनरी के काम-काज में तेजी आएगी।

चुनाव जीतने, मुख्यमंत्री चुनने, मंत्रिमण्डल के गठन और अब विभागों के बंटवारे तक कई तरह के असंतोष पार्टी नेताओं के बीच नजर आए हैं। टीएस पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं और मुख्यमंत्री पद के दावेदार भी थे, लेकिन रूचि का विभाग न मिलने से मायूस हैं।

उन्होंने खुद इस बात का खुलासा किया है कि वित्त विभाग मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने पास रखना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने इस पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया या नाराजगी जाहिर नहीं की। उन्होंने कहा कि विभागों और मंत्रियों के बीच संतुलत को देखते हुए उन्हें जो जिम्मेदारी दी जाएगी, वे निभाएंगे।

इससे पहले मंत्रिमण्डल गठन के दौरान भी कुछ योग्य विधायकों में मंत्री न बन पाने का असंतोष नजर आया था। धनेन्द्र साहू, सत्यनारायण शर्मा, अमितेश शुक्ला, अमरजीत भगत, रामपुकार सिंह जैसे योग्य और वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमण्डल में शामिल नहीं किया गया।

हालांकि इस बात को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी अफसोस है। उनका कहना है कि वे चाहते हैं 90 विधानसभा वाले छत्तीसगढ़ में मंत्रियों की संख्या बड़ाई जाए। इस विषय में उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखने की बात भी कही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विभागों के बंटवारे को लेकर कहा कि सभी मंत्रियों को योग्यता और रूचि के आधार पर ही विभागों के बंटवारे किए जाएंगे।

विभाग बंटवारे का प्रस्ताव

भूपेश बघेल- राजस्व, खनिज, ऊर्जा,

टीएस सिंहदेव- वित्त, स्वास्थ्य

ताम्रध्वज साहू- गृह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास

रविंद्र चौबे- पीडब्ल्यूडी, संसदीय कार्य, विधि

मो. अकबर- उच्च शिक्षा, अल्प संख्यक विकास

डॉ. प्रेमसाय टेकाम- कृषि, जल संसाधन

कवासी लखमा- वन आदिमजाति कल्याण

डॉ. शिवकुमार डहरिया- खाद्य नागरिक आपूर्ति

उमेश पटेल- स्कूल शिक्षा, खेल एवं युवा कल्याण

अनिला भेंड़िया- महिला एवं बाल विकास

गुस्र् रूद्र कुमार- संस्कृति पर्यटन

जयसिंह अग्रवाल- श्रम

Posted By: Sandeep Chourey

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