रायपुर। आधा दर्जन विधायकों के नाम पर उलझ गए, तो कांग्रेस हाईकमान व सीएम भूपेश बघेल ने मंत्री के एक पद को अभी खाली ही छोड़ दिया। शेष पद पर नाम कब तक फाइनल होगा, यह अभी तय नहीं है। जो नाम छूट गए हैं, उन्हें किस तरह से संतुष्ट किया जाए, इस पर सरकार विचार कर रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मंत्री के लिए दुर्ग संभाग से रविंद्र चौबे, मोहम्मद अकबर, अनिला भेड़िया, गुरुरुद्र कुमार, अस्र्ण वोरा के नाम पर मंथन हुआ। दुर्ग संभाग से वरिष्ठता के आधार पर चौबे को फाइनल किया। अल्पसंख्यक वर्ग से अकबर व महिला से अनिला को लेना ही था।

गुरुरुद्र सतनामी समाज के गुरु हैं, इसलिए उन्हें छोड़कर पार्टी लोस चुनाव से पहले सतनामी वोटरों को नाराज नहीं कर सकती थी। वोरा के लिए उनके पिता मोतीलाल वोरा भी जोर लगा रहे थे, लेकिन दुर्ग संभाग से मंत्रियों की संख्या अधिक होने पर वोरा को रोक दिया।

बिलासपुर संभाग से दो नाम पहले से तय थे। युवा प्रतिनिधित्व के लिए युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते विधायक उमेश पटेल और वरिष्ठता के आधार पर अग्रवाल समाज के जयसिंह अग्रवाल को लेना ही था।

सरगुजा संभाग से रामपुकार सिंह और डॉ. प्रेमसाय सिंह के नाम पर चर्चा हुई। मंत्री टीएस सिंहदेव की पसंद पर प्रेमसाय सिंह को मंत्री के लिए चुना गया। रायपुर संभाग से सत्यनारायण शर्मा, धनेंद्र साहू, अमितेष शुक्ल व डॉ. शिवकुमार डहरिया के नाम पर विचार हुआ।

इस संभाग में वरिष्ठता को किनारे करके जातिगत समीकरण को प्राथमिकता देते हुए डहरिया को चुना। बस्तर से कवासी लखमा, लखेश्वर बघेल व मनोज मंडावी के नाम पर चर्चा हुई। वरिष्ठता के आधार पर लखमा का नाम फाइनल किया।

मंत्री के एक पद के लिए लखेश्वर बघेल, मनोज मंडावी, अमितेष शुक्ल, धनेंद्र साहू, सत्यनारायण शर्मा, अस्र्ण वोरा का नाम बच गया। काफी माथापच्ची के बाद भी इसमें से एक नाम नहीं चुना जा सका।

बस्तर, सरगुजा के विधायक को मिल सकता है राज्य मंत्री का दर्जा

बस्तर संभाग से बघेल या मंडावी को बस्तर विकास प्राधिकरण में पद देकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया जा सकता है। वहीं, सरगुजा संभाग से भी एक विधायक को सरगुजा विकास प्राधिकरण का पद मिल सकता है। रामपुकार सिंह को सरगुजा विकास प्राधिकरण में पद मिल सकता है या फिर उन्हें विधानसभा उपाध्यक्ष भी बनाया जा सकता है।

एक नाम चुनना चुनौती रहेगी

मंत्री के बचे हुए एक पद के लिए तीन सामान्य सत्यनारायण शर्मा, अमितेष शुक्ल व अरुण वोरा, आदिवासी वर्ग से दो मनोज मंडावी, लखेश्वर बघेल और ओबीसी से एक धनेंद्र साहू दावेदार हैं। बस्तर संभाग से पहली बार एक विधायक को मंत्री बनाया गया है।

इस कारण एक और मंत्री बनाने की मांग हो रही है। रायपुर शहर से भाजपा सरकार के तीनों कार्यकाल में दो मंत्री रहे, लेकिन कांग्रेस सरकार ने तीन विधायकों में से एक को भी मंत्री नहीं बनाया। इसमें वरिष्ठता पर शर्मा सबसे ऊपर हैं। उधर, साहू समाज धनेंद्र साहू के मंत्री नहीं बनने पर नाराज है। ऐसी स्थिति में किसी एक नाम को चुनना चुनौती रहेगी।

Posted By: Sandeep Chourey

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