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रायपुर। छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब भाजपा संगठन पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की नब्ज टटोलने के लिए मैदान में उतरा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक बस्तर में एक-एक विधानसभा की समीक्षा कर रहे हैं।

विधानसभा चुनाव में हार के बाद संगठन ने जो समीक्षा की, उसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें तो प्रदेश की हर लोकसभा में भाजपा करीब दो लाख वोट के अंतर से हारी है। सबसे बुरी हार पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के गृहजिला कवर्धा में मिली है। यहां की कवर्धा और पंडरिया विधानसभी सीट में भाजपा उम्मीदवार करीब 90 हजार वोट से हारे हैं।

केंद्रीय संगठन को भेजी जाएगी रिपोर्ट

विधानसभा चुनाव के परिणाम ने पार्टी के दिग्गजों की नींद उड़ा दी है। अब पार्टी बस्तर में हार की समीक्षा के साथ लोकसभा चुनाव की तैयारी में उतरी है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दो दिन में रिपोर्ट तैयार कर केंद्रीय संगठन को भेजेंगे।

भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का अपना बूथ सबसे मजबूत अभियान पूरी तरह से फेल हो गया। यही नहीं, भाजपा वोटरों की नब्ज पकड़ने में भी कामयाब नहीं हो पाई। भाजपा प्रदेश संगठन को भी यह उम्मीद नहीं थी कि प्रदेश में इतनी करारी हार का सामना करना पड़ेगा। वर्ष 1985 के बाद छत्तीसगढ़ में भाजपा अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंची है।

यह हाल तब है जब प्रदेश में करीब 25 लाख लोग भाजपा के सदस्य हैं। भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो अविभाजित मध्यप्रदेश में भी बस्तर और सरगुजा से भाजपा के विधायक और सांसद चुने जाते थे। इस चुनाव में सरगुजा संभाग की 14 में से शून्य और बस्तर की 12 में से सिर्फ एक सीट पर भाजपा को जीत मिली है।

तीन आदिवासी मंत्री बनाए, फिर भी जीत नहीं सके दिल

भाजपा ने पिछली सरकार में तीन आदिवासी मंत्री बनाए थे। इसमें गृहमंत्री रामसेवक पैकरा, शिक्षा मंत्री केदार कश्यप, वन मंत्री महेश गागड़ा को मंत्री बनाया गया। यही नहीं, रमन सरकार ने जातिगत समीकरण के आधार पर मंत्रिमंडल का गठन किया है। बावजूद इसके जनता ने बुरी तरह नकार दिया।

 

Posted By: Hemant Upadhyay

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