रायपुर। मंत्रिमंडल में स्थान न मिलने से नाराज वरिष्ठ विधायकों को संतुष्ट करने के लिए कांग्रेस सरकार रास्ता तलाशने में लगी है। निगम-मंडलों में कुछ वरिष्ठ विधायकों की नियुक्ति करने की तैयारी चल रही है। वहीं, डैमेज कंट्रोल के लिए संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर भी विचार चल रहा है। दो मंत्रियों, टीएस सिंहदेव और मोहम्मद अकबर ने संसदीय सचिवों की नियुक्ति के संकेत भी दिए हैं।

मंगलवार को नौ मंत्रियों के शपथ लेने के बाद आधा दर्जन से अधिक वरिष्ठ विधायक नाराज हो गए हैं। लोकसभा चुनाव को देखते हुए उनकी नाराजगी पार्टी की सेहत के लिए ठीक नहीं रहेगी। इस कारण असंतुष्टों को मनाने की कवायद शुरू हो गई है। दो दर्जन से अधिक निगम-मंडल अध्यक्ष के पद हैं, यह रास्ता तो खुला हुआ है। इसके अलावा संसदीय सचिवों के पद पर नियुक्ति की चर्चा शुरू हो गई है।

कांग्रेस सरकार में संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर भाजपा की पहले से नजर है, क्योंकि विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने भाजपा सरकार में बनाए गए संसदीय सचिवों का विरोध किया था। मंत्री अकबर ने तो संसदीय सचिवों के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका भी लगाई थी, लेकिन अब अदालत के आदेश के बाद संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर विचार की बात कह रहे हैं।

विधायकों में है भारी नाराजगी
विधायक धनेंद्र साहू, अमितेष शुक्ल और अस्र्ण वोरा ने तो शपथ ग्रहण समारोह और सीएम की डिनर पार्टी का बायकाट कर दिया था। वहीं, मोहन मरकाम, मनोज मंडावी, सत्यनारायण शर्मा भी मायूस हैं। मरकाम और मंडावी हाईकमान से बात करने वाले हैं। रामपुकार सिंह नाराज होकर समर्थकों के साथ अपने निर्वाचन क्षेत्र लौट गए। लखेश्वर बघेल के समर्थकों ने बुधवार को नेशनल हाइवे जाम कर दिया और आदिवासी समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया था।

...तो रूठ जाएंगे संगठन के नेता
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के लिए विधायकों और संगठन के नेताओं को संतुष्ट करने की चुनौती है, क्योंकि निगम-मंडल के अध्यक्ष का पद विधायकों को दिया जाता है, तो संगठन के नेता रूठ जाएंगे। उनका कहना है कि हाईकमान ने जिन 90 नेताओं को विधानसभा चुनाव लड़ाया, अब उन्हें छोड़कर दूसरे नेताओं को निगम-मंडल में पद दिया जाए।

हाईकोर्ट का आदेश, अतिरिक्त सुविधाएं नहीं मिलेंगी
भाजपा सरकार में 11 संसदीय सचिवों को मंत्रियों की तरह सुविधाएं और काम करने का अधिकार मिला हुआ था। विपक्ष में रहते हुए अकबर और आरटीआइ कार्यकर्ता राकेश चौबे ने अलग-अलग याचिका दायर की थी जिसमें कहा था कि संसदीय सचिव लाभ का पद है। नियुक्तियों को रद करने की अपील की थी। इसी साल चार-पांच माह पहले अदालत ने आदेश दिया था कि संसदीय सचिव अपने पद पर बने रहेंगे, लेकिन इस संबंध में मिलने वाले अधिकार और अतिरिक्त सुविधाओं का उपभोग नहीं कर सकेंगे।

मंत्रियों ने कहा-बनाए जा सकते हैं संसदीय सचिव
मंत्री टीएस सिंहदेव और मोहम्मद अकबर का कहना है कि जब अदालत ने संसदीय सचिव के पदों को असंवैधानिक करार नहीं दिया, तो बिल्कुल उन पदों पर नियुक्ति का विचार हो सकता है। इनकी संख्या भी बढ़ाई जा सकती है। अदालत के आदेशानुसार यह किया जा सकता है कि संसदीय सचिवों को मंत्रियों की तरह अतिरिक्त सुविधाएं न दी जाएं।

Posted By: Hemant Upadhyay

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