मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में बदलाव के बाद अब ब्यूरोक्रेसी में बदलाव की चर्चा जोरों पर है। उच्च प्रशासनिक हलके में यह चर्चा है कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही मुख्य सचिव अजय सिंह और डीजीपी एएन उपाध्याय को बदला जा सकता है।

दोनों ही अधिकारियों पर मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के करीबी होने का ठप्पा लगा हुआ है। डीजीपी एएन उपाध्याय चार साल से ज्यादा का कार्यकाल भी पूरा कर चुके हैं। मंत्रालय में उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो भाजपा की विचारधारा से प्रभावित अफसरों को चुन-चुन कर मंत्रालय से बाहर किया जाएगा। नई सरकार बनते ही अजय सिंह की जगह नए चीफ सेके्रटरी की भी तैनाती होगी।

यही नहीं, पुलिस मुख्यालय में भी आला स्तर पर बड़े बदलाव की संकेत मिल रहे हैं। दरअसल, विपक्ष में रहने के दौरान कांग्रेस के विधायकों से लेकर कार्यकर्ताओं पर जमकर पुलिसिया अत्याचार हुआ है। इसको देखते हुए चर्चा यह है कि कई आईजी और एसपी भी बदले जाएंगे। बस्तर में झीरम कांड के समय पदस्थ पुलिस अधिकारियों को जांच का भय सताने लगा है। झीरम कांड के समय आईजी इंटेलिजेंस के पद पर पदस्थ मुकेश गुप्ता कांग्रेस के निशाने पर रह सकते हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल के खिलाफ ईओडब्ल्यू में मुकेश गुप्ता के कार्यकाल में मामला दर्ज हुआ है। इसके विरोध में भूपेश अपनी मां और पत्नी के साथ ईओडब्ल्यू कार्यालय के बाद धरने पर बैठे थे। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि मुकेश गुप्ता की भी छुट्टी हो सकती है। रमन सरकार में आईपीएस मुकेश गुप्ता, आरके विज और संजय पिल्ले को स्पेशल डीजी बनाया गया है।

डीजीपी की दौड़ में नायक, अवस्थी और विज

गृह विभाग में यह चर्चा है कि प्रदेश का अगला डीजीपी डीएम अवस्थी और आरके विज में से किसी को बनाया जा सकता है। वरिष्ठता के आधार पर एएन उपाध्याय से सीनियर आईपीएस गिरधारी नायक हैं। उन पर कांग्रेस का करीबी होने का आरोप लगने के बाद रमन सरकार ने डीजीपी नहीं बनाया है। बताया जा रहा है कि नायक भी लाबिंग में जुटे हुए हैं।

Posted By: Hemant Upadhyay

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