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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में मतगणना ईवीएम व वीपीपैट से 50-50 फीसद कराने संबंधी कांग्रेस की याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन आयोग के नियम में मतगणना के लिए नई विधि लागू करने का अधिकार उन्हें नहीं है।

कांग्रेस के संयुक्त महामंत्री गिरीश देवांगन ने विधानसभा चुनाव 2018 में धमतरी में अधिकारियों के अनाधिकृत रूप से स्ट्रांग रूम में प्रवेश करने, बेमेतरा में स्ट्रांग रूम के पास लैपटॉप समेत पुलिस अधिकारी देखे जाने व जगदलपुर में लैपटॉप समेत तीन संदिग्धों के पकड़े जाने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए ईवीएम से 50 प्रतिशत तथा 50 प्रतिशत मतों की गिनती वीवीपैट की पर्ची से करने की मांग की थी।

याचिका में राज्यसभा सदस्य व वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने पैरवी करते हुए कोर्ट को बताया कि पटवारी व तहसीलदार स्ट्रांग रूम में घुस कर एक घंटे तक अंदर थे। इनके द्वारा ईवीएम से छेड़छाड़ किए जाने का संदेह व्यक्त है। मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार मतगणना कराने दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई। याचिका पर सुनवाई जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की कोर्ट में हुई।

कोर्ट ने सात पृष्ठों में आदेश जारी किया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पीसीसी ने ऐसा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया है जिसमें ईवीएम से कोई छेड़छाड़ की गई हो। इसकी शिकायत निर्वाचन आयोग से की गई है। आयोग ने 50 प्रतिशत मतों की गणना वीवीपैट से कराने कोई गाइड लाइन जारी नहीं की है।

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि परिणाम घोषित होने के बाद किसी प्रत्याशी के अनुरोध पर वीवीपैट से गणना की जा सकती है। नए नियम से मतगणना कराने का निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया जाना हाई कोर्ट के क्षेत्राधिकार से बाहर है। इस आधार पर याचिका को खारिज किया गया।

 

Posted By: Hemant Upadhyay

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