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रायपुर। भूपेश बघेल अब अधिकारिक रूप से सूबे के सरदार बन गए हैं। सोमवार को दिनभर हो रही रिमझिम बारिश के बीच राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें मुख्यमंत्री के पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। बघेल मंत्रिमंडल के पहले दो मंत्री त्रिभुवेश्वर शरण सिंहदेव (टीएस बाबा) और ताम्रध्वज साहू ने भी शपथ ली।

इस शपथ ग्रहण समारोह के कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री नारायण सामी समेत कई पूर्व मंत्री, वरिष्ठ नेता और प्रदेश के विभिन्न् जिलों से आए हजारों लोग साक्षी बने।

बूढ़ापारा स्थित सरदार बलवीर सिंह जुनेजा इनडोर स्टेडियम में शपथ ग्रहण समारोह सम्पन्न् हुआ। इसमें बघेल, सिंहदेव व साहू के अलावा पार्टी के बाकी 65 विधायक भी शामिल हुए। मुख्य सचिव अजय सिंह ने शपथ ग्रहण समारोह का संचालन किया।

15 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखने को मिला। उत्साहित कार्यकर्ता लगातार राहुल गांधी और बघेल के लिए नारेबाजी करते रहे। मुख्य समारोह के केवल दस मिनट का ही था। शपथ ग्रहण के पहले और बाद में राष्ट्रगान हुआ। शपथ दिलाने के बाद राज्यपाल ने मुख्यमंत्री और दोनों मंत्रियों को पुष्पगुच्छ दिया।

राष्ट्रीय नेताओं की उपस्थिति ने बढ़ाई गरिमा

समारोह में राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, सांसद मोतीलाल वोरा, मल्लिकार्जुन खडगे, पीएल पुनिया, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फास्र्ख अब्दुल्ला, शरद यादव, राजीव शुक्ला, राज बब्बर, पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू, मोहसिना किदवई, आनंद शर्मा, नवीन जिंदल, शरद पवार, ज्योतिरादित्य सिंधिया, एनके प्रेमचंदन, डॉ. चंदन यादव, डॉ. अस्र्ण उरांव, रागिनी नायक, जयवीर शेरगिल शामिल हुए।

रमन और विपक्ष के नेता हुए शामिल

कांग्रेस सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के अलावा विधायक बृजमोहन अग्रवाल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल भी शामिल हुए।

बारिश की वजह से बदला स्थान, फिर भी खचाखच जुटी भीड़

शासन, प्रशासन और पुलिस 13 दिसंबर से साइंस कॉलेज में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी कर रहे थे। पहले समारोह की संभावित तिथि 15 दिसंबर थी, लेकिन मुख्यमंत्री का नाम 15 की रात को फाइनल हो पाया। 16 दिसंबर को घोषणा हुई।

साइंस कॉलेज मैदान में तैयारी पूरी हो चुकी थी, लेकिन 16 दिसंबर की रात मौसम का मिजाज बदल गया। रिमझिम बारिश शुरू हुई, जो सोमवार रात तक नहीं थमी। ऐसी स्थिति में जगह बदलनी पड़ी। इनडोर स्टेडियम को आनन-फानन में तैयार करना पड़ा। उसके बाद भी खचाखच भीड़ रही। जितने लोग अंदर थे, लगभग उतने ही बारिश में बाहर खड़े रहे।

छत्तीसगढ़ी में नहीं ले पाए शपथ

बघेल की इच्छा थी कि वे छत्तीसगढ़ी में शपथ लें। उन्होंने इस बारे में राजभवन में बात की। राजभवन से उन्हें बताया गया कि छत्तीसगढ़ी भाषा संविधान की अधिसूची में शामिल नहीं है। इस कारण उन्‍हें हिंदी में ही शपथ लेनी होगी। बघेल ने प्रदेश की बोली में शपथ लेने की सोची थी। अगर, उन्हें अनुमति मिल गई होती, तो वे छत्तीसगढ़ी में शपथ लेने वाले प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री होते।

Posted By: Hemant Upadhyay

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