दरभंगा, जेएनएन। बहादुरपुर विधानसभा क्षेत्र का अस्तित्व वर्ष 2010 आया।  इस क्षेत्र से मदन सहनी जदयू  के टिकट से पहली बार विधायक बने। फिलहाल यहां के वर्तमान विधायक राजद के भोला यादव हैं। 2015 के चुनाव में राजद, जदयू और कांग्रेस के महागठबंधन के तहत मदन सहनी गौड़ाबौराम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और जीते । लेकिन, इस बार के चुनाव में फिर मंत्री मदन सहनी अपने पुराने क्षेत्र बहादुरपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। इनके सामने महागठबंधन के राजद प्रत्याशी आरके चौधरी चुनावी मैदान में  हैं। जबकि, बहादुरपुर के वर्तमान विधायक भोला यादव बगल के हायाघाट क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं।  

प्रमुख मुद्दे 

जलजमाव : बहादुरपुर विधानसभा क्षेत्र में बहादुरपुर और हनुमाननगर प्रखंड के सभी पंचायतों ओर गांवों को शाामिल किया गया है। भौतिकवादी व्यवस्था में भी इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है। सबसे बड़ी समस्या जलजमाव की है। जिले के दूसरा दियारा क्षेत्र कहलाने वाले हुनमाननगर प्रखंड इन दिनों बदहाल है। कृषि योग्य भूमि में सालों भर बाढ़ और बारिश का पानी जमा रहता है। निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। बेनीबाद से दरभंगा-समस्तीपुर मुख्यमार्ग के रक्शी पुल से करेह नदी में गुजरने वाली अधवारा समूह की नदी कई भागों में बंट गया है। आजादी के बाद से इस नदी का कभी उड़ाहीकरण नहींं किया गया है। यही कारण है कि बाढ़ के दौरान विभिन्न दिशाओं में नदी की धारा बहने लगती है। जलजमाव की समस्याएं किसान की किसानी को तोड़कर रख दिया है। यह इलाका बाढ़ के लिए काफी खास है। नेपाल से आने वाली तमाम पानी यहीं आकर ठहर जाता है। इस इलाके से सटे समस्तीपुर जिले का रिंग बांध है। यही समस्या बहादुरपुर प्रखंड के लोगों के लिए है। विभिन्न इलाकों में पोषक क्षेत्र बंटा है। भूमाफिया ने कमला नदी और एकमी नदी को जोडऩेे वाली नहर को बेच डाला है। इससे निचले इलाके में जलजमाव की समस्या लोगों को परेशान कर दिया है। 

शिक्षा : शिक्षा के क्षेत्र में आज भी बेहतर कार्य करने की दरकार है। गांव-गांव में स्कूल है। भवन है। शिक्षक भी हैं। लेकिन, शिक्षा नहीं । यही कारण है गरीब बच्चे भी सरकारी की जगह निजी स्कूल की ओर टकटकी लगाए रहते हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना उनके भविष्य से खिलवाड़ करने के बराबर है। 

स्वास्थ्य : स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए आज भी लोगों को शहर की ओर रूख करना होता है। सरकारी अस्पताल को हाइटेक किया गया है। लेकिन, चिकित्सक और कॢमयों की घोर कमी है। दवा समय पर मरीज को नहींं मिलती है। जांच की उत्तम व्यवस्था नहीं है। ऐसी स्थिति मरीजों को पीएचसी अथवा एपीएचसी में लोग ले जाने से डरते हैं। कहा जाता है कि सरकारी अस्पताल सिर्फ पुलिस केस के लिए बनकर रह गया है। 

 

मैदान में 15 प्रत्याशी

इस बार यहां मुख्य मुकाबला जदयू के उम्मीदवार सूबे के खाद्य आपूॢत मंत्री मदन सहनी एवं राजद के रमेश चौधरी के बीच है। हालांकि यहां से चुनाव मैदान में 15 प्रत्याशी हैं।

1. मदन सहनी (जदयू)

2. रमेश चौधरी (राजद)

3. देवेन्द्र कुमार झा (लोजपा)

4. प्रियंका ङ्क्षसह (द प्लूरल्स पार्टी)

5. मनीष कुमार (भारतीय गरीब मजदूर पार्टी)

6. मो. सलाउद्दीन (बहुजन समाज पार्टी)

7. रामभजन चौधरी (राष्ट्रीय जन जन पार्टी)

8. विनय कुमार सिंह (निर्दलीय)

9. बलदेव राम (निर्दलीय)

10. कृष्ण कुमार दास (राष्ट्रीय जन विकास पार्टी)

11. अरुण ठाकुर (लोग जन पार्टी)

12. विक्रम सिंह (भारतीय सब लोग पार्टी)

13. विरेन्द्र कुमार पासवान (वंचित बहुजन अघाडी)

14. रोहित कुमार पासवान (आजाद समाज पार्टी कांशीराम)

15. महेंद्रर सहनी (निर्दलीय)

अब तक ये रहे विधायक :

2010- मदन सहनी (जदयू)

2015- भोला यादव (राजद)

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