पटना, जेएनएन। कोरोना काल में हो रहे विधान सभा चुनाव के लिए प्रदेश में सवा लाख से अधिक बूथ बनाए गए हैं। 14 लाख से अधिक चुनाव व सुरक्षाकर्मी इसमें योगदान देंगे। ऐसे में मतदान के पहले सभी की कोरोना जांच अब नहीं कराई जाएगी। इसकी जगह जो विभाग चुनाव में लगे अपने कर्मचारियों की सूची देकर कोरोना जांच कराने का आग्रह करेंगे, उन्हीं की कोरोना जांच की जाएगी। बताते चलें कि शनिवार को फुलवारीशरीफ में चुनाव ड्यूटी में आए सीआरपीएफ जवानों की कोरोना जांच कराई गई थी। इसमें से आठ लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी।

संक्रमित मतदाताओं की पहचान पर जोर, चुनावकर्मियों पर नहीं : निर्वाचन आयोग ने कोरोना संक्रमित व आशंकितों की पहचान कर उनका चुनाव अंतिम एक घंटे में कराने का निर्देश दिया है। इसके तहत पहले चरण के मतदान के लिए पटना की पांच विधानसभा क्षेत्र के कंटेनमेंट जोन में रहने वाले सभी लोगों की जांच का काम शुरू भी हो गया है। वहीं चुनावकर्मियों में कोई संक्रमित है कि नहीं है, इसके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

बूथ की तुलना में चुनावकर्मियों की कमी भी एक कारण : बूथों की संख्या के अनुपात में चुनावकर्मियों के लिए बहुत विकल्प नहीं है। इसमें भी गर्भवती महिलाओं, गंभीर रोगों से ग्रसित लोगों, सर्जरी कराए लोगों की ड्यूटी नहीं लगानी है। ऐसे में यदि सभी की कोरोना जांच कराई जाएगी तो संकट और बढ़ सकता है।

चुनावकर्मियों को कोरोना बचाव के उपायों का सख्ती से लागू करना जरूरी : हर बूथ पर करीब सात चुनावकर्मियों के अलावा सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। शारीरिक दूरी के नियम का पालन कराने के लिए इस बार प्रदेश में एक लाख 36 हजार से अधिक बूथ बनाए गए हैं। ऐसे में यदि कोई चुनावकर्मी बिना लक्षण वाले कोरोना से संक्रमित हुआ तो वह अपने साथियों को भी चपेट में ले सकता है। ऐसे में बेहतर होगा कि  चुनावकर्मी मास्क, शारीरिक दूरी और हैंड सैनिटाइजेशन के नियम का सख्ती से पालन करें।

सिविल सर्जन डॉ. विभा कुमार सिंह कहती हैं, सभी चुनावकर्मियों की कोरोना जांच कराने का कोई निर्देश नहीं मिला है। जो अधिकारी अपने विभाग चुनाव कार्य में लगे अपने कर्मचारियों-अधिकारियों की सूची देकर उनकी जांच कराने का आग्रह कर रहे हैं, उनके लिए निश्चित जगह पर टीम भेजी जा रही है।

 

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