उचकागांव (गोपालगंज) : इस गांव में पोल और तार तो पहले की लगा दिए गए थे। फिर भी उचकागांव प्रखंड के नौतन हरैया गांव के ग्रामीणों की रातें लालटेन की रोशनी में कटती थी। लेकिन अब उसी पोल और तार के माध्यम से इस गांव में 22 घंटे बिजली हर घर में अपनी रोशनी बिखेर रही है। पहले कच्चे रास्ते पर चल कर अपने घर पहुंचने वाले ग्रामीण अब गांव की गलियों में बनी पीसीसी सड़क पर चलते हैं। विकास के दस्तक देने से इस गांव की दशा पहले से काफी सुधर गई है। लेकिन जमीन स्तर पर दिख रहा इस बदलवा के बीच भी इस गांव के लोग कई सरकारी योजनाओं से अभी तक वंचित हैं। प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के बाद भी इस गांव के कई गरीब परिवार के घरों में लकड़ी के चूल्हे की आंच नहीं बुझ सकी है। इस योजना का अभी तक लाभ पाने से वंचित रह गए गरीब परिवार के घरों की महिलाएं लकड़ी के चूल्हे से उठती धुआं के बीच खाना बना रही हैं। नल जल योजना का काम पूरा होने के बाद भी इस गांव के लोगों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो रहा है।

सुबह के आठ बजे हैं। हवा में नमी के कारण ठंड के एहसास के बीच निकली धूप राहत दे रही है। खेत तथा काम धंधा के लिए जाने की जगह ग्रामीण बाहर खाट पर बैठकर धूप का आनंद लेते दिखे। अपने घर के बाहर बैठे जयश्री राम से बातचीत शुरू हुई तो बताया कि धान की कटनी का समय चल राह है। अधिकांश लोग खेती बारी करने के साथ की खेतीहर मजदूर का भी काम करते हैं।।। धान की कटनी के कारण अभी गांव व उसके आसपास ही काम मिल जा रहा है। गांव के विकास को लेकर बात चली तो उन्होंने बताते हैं कि पहले से काफी विकास हुआ है। पहले इस गांव में आने के लिए कच्ची सड़क थी। अब गांव आने वाली सड़क पक्की हो गई है। गांव की गलियों मे भी पीसीसी सड़क बन गई है। पहले पोल तार लगने के बाद भी बिजली नहीं रहती थी। कुछ लोगों को छोड़कर किसी के घर में बिजली का कनेक्शन नहीं था। अब हर घर में बिजली पहुंच गई है। 22 घंटे बिजली मिल रही है। वे बताते हैं कि दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना से गांव के सभी मोहल्ल के लिए अलग-अलग ट्रांसफार्मर लगा दिया गया है। इस गांव में दलित बस्ती में जाने पर नल जल योजना के तहत लगाए गए नल पर अपने बच्चों का कपड़ा धो रही कुलवती देवी दिखती हैं। बात करने पर उन्होंने बताया कि नल जल योजना से गांव के हर घर को जोड़ दिया गया है। लेकिन घरों में पानी नहीं मिल रहा है। दलित बस्ती में इस योजना के तहत लगाए गए नल से ही लोग काम चलाते हैं। उन्होंने बताया कि पति के निधन के बाद अभी तक कबीर अंत्येष्टि योजना का लाभ उनके परिवार को नहीं मिला है। अगल- बगल के गांव के गरीब परिवारों को आयुष्मान योजना के तहत पांच पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिल गई है। लेकिन इस गांव के गरीब इस योजना से अभी तक वंचित हैं। वे बताती हैं कि मोतियाबिद का ऑपरेशन करना है, लेकिन पैसा नहीं है। इन्हें आयुष्मान भारत योजना के तहत अपना स्वास्थ्य कार्ड बनने का इंतजार है। कुछ आगे बढ़ने पर अपने घर में लकड़ी के चूल्हा पर खान बना रही उमा देवी दिखीं। इनसे बात करने पर इन्होंने बताया कि गांव के कई लोगों को उज्जवला योजना से रसोई गैस का कनेक्शन मिल गया है। लेकिन उनके जैसे कई गरीब परिवार के लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिला है। इन घरों की महिलाएं लकड़ी के चूल्हा पर खाना बनाती हैं।

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