जागरण संवाददाता, कन्नौज : सहकारिता विभाग की प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों की कंगाली का असर किसानों व उनकी फसलों पर पड़ रहा है। कहने को समितियों में खाद व बीज की कमी नहीं है और यूरिया का स्टॉक भरा पड़ा है, लेकिन हकीकत बिल्कुल इतर है। कन्नौज सदर ब्लॉक की छह साधन सहकारी समितियां बरौली, महमूदपुर पैठ, नजरापुर, मौसमपुर मौरारा, सरायमीरा व कन्नौज कछोहा पर जिला सहकारी बैंक का 4.35 करोड़ रुपये बकाया है। इस कारण बैंक ने समितियों को उर्वरक खाते पर ऋण देना बंद कर दिया है। इस वजह से समितियां रबी फसल के लिए किसानों को उर्वरक, बीज व कीटनाशक खरीद कर नहीं दे पाई हैं। अक्टूबर से समितियों का खजाना खाली होने से गोदाम खाली है। इसे किसान प्रभावित हैं। कन्नौज कछोह समिति एक साल से बंद, जबकि अब सरायमीरा समिति बंद होने की चर्चा है। दावे खोखले, किसानों का हो रहा शोषण

समितियां उर्वरक खाता पर सहकारी बैंक से ऋण लेकर कारोबार करतीं हैं। ऋण मिलने पर समिति खाद, बीज व कीटनाशक खरीद कर किसानों को ऋण के तौर पर बिक्री करतीं हैं, जो किसान फसल बेचने के बाद या सुविधानुसार धीरे-धीरे चुकाते हैं। ब्याज से समिति व बैंक की आमदनी होती है। यहां किसानों को उचित दाम पर सामग्री मिलती है और समय की बचत होती है, लेकिन अब इन समितियों के सैकड़ों किसान निजी दुकानों पर खरीद कर रहे हैं। जहां नकद व अधिक दाम का शिकार हो रहे हैं। इस पर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं है। समितियों के ये खाते खाली

-अल्पकालीन ऋण खाता

-उर्वरक खाता

-प्रबंधकीय व वेतन भोगी खाता

-प्रकीर्ण खाता

-भवन निधि खाता -अंश क के तहत पुराने व नए किसानों को ऋण दे रहे हैं। वसूली समिति के माध्यम से होती है। इस पर ब्याज समिति को भी मिलता है। - अनुभव सागर, जिला सहकारी बैंक, शाखा कन्नौज -समितियों की स्थिति बेहद खराब है। ऋण न मिलने के कारण काम पूरी तरह से ठप है। इससे उर्वरक समेत अन्य कृषि सामग्री की खरीद व बिक्री बंद है।

-सुभाषचंद्र यादव, एडीओ, सहकारिता

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