जमुई। खैरा चौक स्थित एक चाय की दुकान पर गुरुवार की संध्या लोग चाय की चुस्की के साथ संपन्न हुए विधानसभा चुनाव पर चर्चा कर रहे थे। सभी की जुबां पर चुनावी समर में रहे प्रत्याशियों की हार-जीत के साथ शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न होने की बात कर रहे थे।

चर्चा के दौरान पास में बैठे एक बुजुर्ग कहते हैं, चलिए चुनाव में कोई जीते या हारे, क्षेत्र में शांति तो बनी रही। कहीं से अप्रिय सूचना नहीं है। यह सबसे बड़ी बात है। ऐसे ही माहौल में चुनाव संपन्न होना चाहिए। बात सिकंदरा सुरक्षित सीट से चुनावी समर में रहे महागठबंधन और एनडीए सहित निर्दलीय प्रत्याशियों तक की हुई। हार-जीत के आंकड़े और जातीय समीकरण को जोड़ते हुए अपने-अपने चहेते प्रत्याशियों की जीत के दावे किए जाते रहे। एक ऑटो चालक आकर दुकानदार से चाय मांगता है और चुनावी चर्चा सुनकर बोल उठता है। सुनिए चाचा, जीतने के बाद कोई आपसे मिलने भी आएगा या आपको कुछ देगा क्या। रोज कमाना, रोज खाना से छुटकारा थोड़े ही मिलने वाला है। बगल के नास्ते की दुकान पर आज कुछ ज्यादा भीड़ नहीं थी। दो दिन पहले यहां सुबह से ही भीड़ लग जाती थी। नास्ते की दुकान के पास ही एक पार्टी का चुनावी कार्यालय था। सो पार्टी समर्थक व कार्यकर्ताओं का आना सुबह से शुरू हो जाता था और चाय से लेकर नास्ता तक करने के बाद प्रचार में निकलते थे। पूछे जाने पर दुकानदार कहता है चुनावी मेला खत्म हो गया है न सर। अब तो जो रोज नास्ता करने आते थे, वही लोग आएंगे।

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