मुजफ्फरपुर, जेएनएन। कहा जाता है कि राजनीति में कोई मुकम्मल तस्वीर नहीं होती। वर्तमान बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Assembly Elections 2020)में यह बात शत-प्रतिशत सही लग रही। एक सप्ताह पहले और बाद की तस्वीर पूरी तरह बदली हुई है। कल तक जो महागठबंधन (Mahagathbandhan)का झंठा लिए तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने की बात कह रहे थे, वे आज एनडीए के खेमे में हैं। नीतीश कुमार को अपना नेता मान रहे। जी हां, यहां बात हो रही सन आॅफ मल्लाह (Son of Mallah)के नाम से ख्यात मुकेश सहनी और उनकी पार्टी वीआइपी (VIP)की।

महागठबंधन के प्रेस कांफ्रेंस में अपेक्षा से कम सीटें मिलने से नाराज चल रहे मुकेश सहनी (Mukesh Sahani)ने वहां खड़ा होकर तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav)पर पीठ में खंजर भाेंकने का आरोप लगाया। 25 विधानसभा सीट और उपमुख्यमंत्री पद से मुकरने की बात कही। उन्होंने वहां जिस तरह से सभी प्रेक्षकों को चौंकाया। उसके बाद के घटनाक्रम में भी उन्होंने जिस तरह से एनडीए (NDA)में अपना सबकुछ सेट किया और उससे भी अधिक भाजपा (BJP)कोटे की 11 सीटें हासिल कीं, वह भी राजनीति के विश्लेषकों काे चौंकाने वाला कदम ही है।

सबसे अधिक आश्चचर्य मुजफ्फरपुर में भाजपा की ओर से वीआइपी को दी गई बोचहां और साहेबगंज सीट पर है। ये दो ऐसी सीटें हैं जो एक तरह से बीजेपी की गढ़ कही जा सकती। तात्पर्य यह कि वह यहां मजबूत स्थिति में है। यहां से उसके उम्मीदवार जीतते रहे हैं। बावजूद इसके भाजपा ने ये दो सीटें वीआइपी को क्यों दे दीं? यह सवाल जिले के लोगों के मन में है। यूं तो इस बारे में आधिकारिक रूप से कहीं भी, कुछ नहीं कहा जा रहा लेकिन, सूत्रों के हवाले से जो खबर आ रही है वह रोचक है। राजनीति में इसे भाजपा का वीआइपी गेम कहा जा रहा।

        दरअसल, मुकेश सहनी की वीआइपी दो साल पुरानी पार्टी है। सूबे के कई जिलों में उनकी पार्टी का ढांचा भी तैयार नहीं है। जिस अंदाज में और जितने कम समय में भाजपा के साथ उनकी बात हुई है, उसके बारे में कहा जा रहा है कि यहां भाजपा प्रत्याशी हमारा, सिंबल आपका वाले फॉर्मूले को अपनाई है। मुकेश से यह कहा गया कि इससे आपको अपनी पार्टी के लिए आधार तैयार करने में मदद मिलेगी। संगठन का एक ढांचा तैयार होगा। अनौपचािरक रूप से कहा जा रहा कि बोचहां सीट से वर्तमान विधायक बेबी कुमारी ही मैदान में होंगी। उसी तरह से साहेबगंज सीट से पूर्व विधायक राजू सिंह ही वीआइपी के सिंबल पर मैदान में आएंगे। हालांकि आधिकारिक रूप से कुछ भी कहा जाना शेष है। कुछ लोग वर्ष 2015 वाली घटना को भी याद कर रहे। जिसमें लोजपा ने एक बार बेबी कुमारी को सिंबल देने के बाद उसे वापस कर लिया था। इन क्षेत्रों में वीआइपी के आधार वोट बैंक की संख्या कम होने से उम्मीदवार का चयन थोड़ा कठिन होगा। 

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