अरुण अशेष, पटना Bihar Election 2020: विधानसभा चुनाव का प्रचार दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। विकास की खूब चर्चा होती है। रोजगार के वायदे किए जाते हैं। चीन और पाकिस्तान की चर्चा होती है। लेकिन, सत्तारूढ़ एनडीए को अब भी सबसे अधिक भरोसा लालू-राबड़ी शासन पर है। उसके सभी नेता अपने भाषण का कम से कम 20 प्रतिशत समय लालू राज के कथित कुशासन के बारे में बताने में खर्च करते हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले चरण के चुनाव यात्रा में लालू राज के कारनामों की चर्चा की। महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव, लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान और रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के भाषण का एक हिस्सा कानून व्यवस्था को समर्पित रहता है।

लालू-राबड़ी राज पर ही चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अक्टूबर को राज्य में तीन चुनावी सभाओं को संबोधित किया। उन्होंने लालू-राबड़ी राज के दिनों की याद दिलाई। बोले-उनके शासन को याद कीजिए, जब लोग रात में स्टेशन पर उतरते थे तो डर के मारे घर नहीं जाते थे। शाम ढलने के साथ ही लोग घरों से नहीं निकलते थे। रात में स्टेशन पर रूकने की घटना एक दौर और खास इलाके के लिए सही है। लेकिन, राज्य के एनडीए के नेता अपने भाषण में उस प्रसंग का जिक्र नहीं करते हैं। इस चुनाव में पहली बार प्रधानमंत्री ने ही इसका जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने अपनी तीनों सभाओं में तथाकथित जंगल राज की चर्चा की। उनके भाषण का विश्लेषण करें तो पता चलेगा कि जिस एक विषय पर उन्होंने सबसे अधिक समय दिया,  वह लालू-राबड़ी राज ही था।

विकास से शुरू लालू-राबड़ी पर खत्‍म

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विकास की खूब चर्चा करते हैं। अपनी सरकार की उपलब्धियों और भविष्य में कुछ अधिक बेहतर करने की घोषणा करते हैं। पर, इनसे भाषण पूरा नहीं होता है। वे लालू-राबड़ी शासन काल के अपराध का पूरा विवरण देते हैं। बताते हैं कि उस शासन काल में शाम ढलने के बाद लोग घर से नहीं निकलते थे। परिवार का कोई सदस्य अगर बाहर गया है तो उसकी वापसी तक लोग बेचैन रहते थे। अपराध के मामले में राज्य अब 23 वें नम्बर पर है। नीतीश सामान्य अपराध के अलावा अपहरण, नरसंहार और सांप्रदायिक दंगे का जिक्र जरूर करते हैं।

तेजस्वी भी कर रहे चर्चा

दिलचस्प यह है कि खराब कानून-व्यवस्था से निजात दिलाने का वादा विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव भी कर रहे हैं। उनके मुताबिक राज्य में कानून का शासन खत्म हो चुका है। हत्या, लूट, डकैती और अपहरण की वारदातों के चलते माहौल पूरी तरह अराजक बना हुआ है। अपराधी खुलेआम राज्य की सत्ता को चुनौती दे रहे हैं। तेजस्वी भी एनडीए के अन्य नेताओं की तरह विकास का और खासकर सरकारी नौकरी देने का वादा करते हैं। फिर भी कानून-व्यवस्था की चर्चा किए बिना उनका भाषण पूरा नहीं होता है।

लालू राज को नहीं कोसते चिराग

लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान 15 साल पुराने शासन की तुलना नहीं करते हैं। वे एनडीए के ही शुरुआती पांच साल की याद दिलाते हैं। कहते हैं कि उस दौर की तुलना में कानून व्यवस्था की हालत बहुत खराब हो गई है। रालोसपा अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा भी अपनी सभाओं में खराब कानून व्यवस्था के बारे में कहना नहीं भूलते हैं।

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