पटना, जयशंकर बिहारी । Bihar Election 2020: विधानसभा चुनाव में प्रचार का रंग अब सुर्ख हो चला है। विकास से प्रारंभ चुनावी भाषण इस्लामाबाद, जिन्ना, जम्मू-कश्मीर, सद्भाव- समभाव से होते हुए वामपंथी  उग्रवाद व मिसाइल तक पहुंच चुके हैं। स्टार प्रचारकों के टोन बदलते जा रहे हैं। इसके पीछे एक्सपर्ट एजेंसियों की सर्वे रिपोर्ट बताई जा रही है। किस बयान पर क्या रिस्पांस सोशल मीडिया और चुनावी रणभूमि पर मिल रहा है। एजेंसियां इसकी टोह पेड वर्करों से ले रही हैं। 40 से कम के वोटर पर सोशल मीडिया से नजर है। जबकि इससे ऊपर वालों का फीडबैक फील्ड सर्वे से लिया जा रहा है।

चरण व क्षेत्र देख मुद्दे में बदलाव स्वाभाविक :

पटना विश्वविद्यालय के प्रो. एनके झा का कहना है कि विधानसभा की 243 सीटों पर तीन चरणों में मतदान होना है। पहले चरण के अधिसंख्य जिले नक्सल प्रभावित हैं। कभी यहां जातीय संगठनों का बोलबाला था। इस चरण में वाम उग्रवाद और जातीय संगठनों को याद किया जा रहा है। दूसरे चरण वाले जिलों में बाढ़ और पलायन बड़ा मुद्दा है। तीसरे चरण में सीमांचल के जिलों में मतदान होना है। यहां हिंदू-मुस्लिम कार्ड खोलने से कोई भी दल बाज नहीं आएंगे।

पेड वर्कर व कार्यकर्ता दे रहे फीडबैक :

चुनावी सर्वे रिपोर्ट तैयार करने के दौरान व्यक्ति की राजनीतिक पृष्ठभूमि, जाति, धर्म, आय, शिक्षा, रोजगार, पेशा, केंद्र व राज्य सरकार को लेकर उनका नजरिया पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बड़ी पार्टी एजेंसियों की रिपोर्ट पर अमल करने से पहले उसकी बाबत क्षेत्र के संजीदा कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेती हैं। नफा-नुकसान की कसौटी पर परखने के बाद ही थिंक टैंक हरी झंडी देता है। हरी झंडी मिलने के बाद संबंधित मुद्दों को भाषण का हिस्सा बनाया जाता है। भाषण में संबंधित मुद्दे के अंश को वायरल कर उसके प्रभाव का आकलन किया जाता है। कार्यकर्ता और पेड वर्कर जमीनी फीडबैक उपलब्ध करा रहे हैं।

सर्वे में एनआइटी व आइआइटी के शिक्षक कर रहे सहयोग

कोरोना काल में अधिसंख्य शिक्षण संस्थानों में कक्षाएं स्थगित हैं। इसका लाभ दलों को सपोर्ट करने वाले प्रोफेसर भुना रहे हैं। एनआइटी पटना के एक प्रोफेसर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, चुनाव में सूचना प्रौद्योगिकी का दखल बढऩे के कारण तकनीकी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों की पूछ बढ़ गई है। सर्वे का डाटा एनालिसिस, भाषण की स्क्रिप्ट, वीडियो व ऑडियो की गुणवत्ता, स्लोगन आदि में सहयोग कर रहे हैं। जेएनयू, डीयू, बीएचयू, पीयू जैसे विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के साथ एनआइटी, आइआइटी, चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (सीएनएलयू), चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान पटना (सीआइएमपी) जैसे नामचीन शिक्षण संस्थानों के शिक्षक इस चुनाव में पर्दे के पीछे से सक्रिय हैं।

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