पटना [शुभ नारायण पाठक]। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Assembly Election 2020)  के लिए आखिरी चरण का मतदान शनिवार की शाम पूरा हो गया। करीब डेढ़ महीने तक चले लोकतंत्र के इस महापर्व के नतीजे आने में अब करीब 50 से 55 घंटे की देर है। एक्जिट पोल (Exit poll) के आंकड़ों के मुताबिक महागठबंधन की सरकार बनने के आसार प्रबल दिख रहे हैं। तमाम सर्वे में राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) इस बार विधानसभा में सबसे बड़ा दल बनते दिख रहा है। अगर सर्वे सही साबित हुए तो प्रदेश में राजद के नेतृत्‍व में सरकार बननी तय है। तमाम सर्वे में राजद को 24 से 26, जबकि महागठबंधन को 40 से 43 फीसद वोट मिलता दिखाया गया है। अगर 2015 के चुनाव की बात करें तो राजद को केवल 18.4 फीसद मत ही मिले थे। पिछले चुनाव में महागठबंधन का स्‍वरूप अलग था और जदयू इस खेमे का हिस्‍सा था। राजद के मतों में इतना बड़ा इजाफा बदले सामाजिक समीकरणों की तरफ सीधा इशारा कर रहा है। तेजस्‍वी (Tejaswi Yadav) यादव के नेतृत्‍व में राजद के नये अवतार को समाज के बड़े तबके का साथ मिला है।

राजद के नये अवतार के लिए तेजस्‍वी ने की कड़ी मेहनत

तेजस्‍वी यादव ने राजद के नये अवतार के लिए लोकसभा चुनाव के बाद कड़ी मेहनत की। इस दौरान उन्‍होंने पार्टी के साथ ही घर में आई चुनौतियों को भी बेहद सलीके से निपटाया। विधानसभा चुनाव के दौरान राजद के अलावा लालू-राबड़ी परिवार का अनुशासन भी देखने लायक रहा। सभी ने पूरी तरह तेजस्‍वी पर भरोसा किया और पूरा चुनाव तेजस्‍वी के चेहरे पर ही लड़ा गया। पिछले कुछ चुनावों के दौरान महात्‍वाकांक्षा का टकराव इस बार बिल्‍कुल देखने को नहीं मिला। परिवार के बाकी सदस्‍य या तो पूरी तरह तेजस्‍वी के साथ दिखे या फिर शांत दिखे।

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राजपूत, ब्राह्मण और भूमिहार से मजबूत चेहरों को किया आगे

कड़क छवि और अनुशासन के लिए चर्चित जगदानंद सिंह (Jagdanand Singh) को पार्टी की प्रदेश इकाई की कमान सौंपकर उन्‍होंने जता दिया था कि अब राजद अपनी पुरानी छवि को बदल देगा। इस बार के विधानसभा चुनाव में पार्टी के राज्‍यसभा सांसद मनोज झा (Manoj Jha) को लीड करने का पूरा मौका दिया गया। उन्‍होंने जीत के लिए रणनीति बनाई और तेजस्‍वी ने उसपर अमल कराया और किया। इसी दौरान अनंत सिंह (Anant Singh) के रूप में मजबूत भूमिहार चेहरे को साथ कर राजद ने बड़ा दांव खेला। ब्राह्मण, राजपूत और भूमिहार समुदाय से मजबूत चेहरों को सामने रखकर तेजस्‍वी ने दिखा दिया कि वे सबको साथ लेकर चलने की सोच रखते हैं और सबका विश्‍वास जीतने में सक्षम हैं।

पिछले चुनाव में एक भी भूमिहार को नहीं मिला था टिकट

2015 के विधानसभा चुनाव में राजद ने एक भी भूमिहार को टिकट नहीं दिया था। तब पार्टी ने ब्राह्मण और कायस्‍थ को एक-एक, जबकि राजपूत उम्‍मीदवारों को तीन सीटों खड़ा किया था। अगड़े उम्‍मीदवार के सहारे पांच में से तीन सीटों पर राजद जीता था, जबकि हारने वाली एक सीट पर मुकाबला काफी नजदीकी रहा था। इस बार विधानसभा चुनाव से पहले ही पार्टी ने अमरेंद्रधारी सिंह को राज्‍यसभा भेजकर भूमिहारों का विश्‍वास जीतने की कोशिश की। बाकी का काम अनंत सिंह की उम्‍मीदवारी से आसान हुआ।

दोगुने से अधिक सवर्णों को दिया टिकट

पिछले चुनाव की अपेक्षा इस बार राजद ने दोगुना से अधिक यानी 13 सवर्णों को टिकट दिया। इनमें आठ राजपूत, चार ब्राह्मण और एक भूमिहार शामिल रहे। पुराने सवर्ण नेताओं के परिवार के सदस्‍यों को टिकट देकर भी राजद ने अपनी पुरानी छवि को तोड़ने की कोशिश की।

कांग्रेस के साथ का भी मिला फायदा

राजद को वोट शेयर बढ़ाने में कांग्रेस के साथ भी फायदा मिला। कांग्रेस को लेकर सवर्णों का रवैया शुरू से नर्म रहा है। कांग्रेस में मदन मोहन झा, शत्रुघ्‍न सिन्‍हा जैसे नेताओं ने तेजस्‍वी के लिए वोट मांगकर राजद का काम काफी हद तक आसान किया।

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