पटना, राज्‍य ब्‍यूरो। Pappu Yadav Interview बिहार की राजनीति में राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की खास पहचान है। उनकी यह पहचान तब बनी जब वह 1990 में निर्दलीय विधायक बनकर बिहार विधानसभा पहुंचे। मधेपुरा के सिंहेश्वरस्थान विधानसभा की सीट से पहली बार विधायक बनने वाले पप्पू यादव ने बेहद कम समय में कोसी बेल्ट के कई जिलों में अपना प्रभाव बढ़ा लिया। अपने सेवा भाव की वजह से मधेपुरा के साथ-साथ पूर्णिया, सहरसा, सुपौल और कटिहार जैसे जिलों में अपने समर्थकों का मजबूत नेटवर्क खड़ा किया। इसका फल भी उन्हें मिला। महज एक साल के अंदर वे विधायक से सांसद भी बन गए।

1991 से लेकर 2014 के बीच वे पांच बार सांसद रहे। लेकिन 2019 में मोदी लहर में वे अपनी सीट नहीं बचा सके। पर हमेशा जनता के मुद्दों को लेकर राजनीति करने वाले पप्पू यादव का जोश कम नहीं पड़ा। उन्होंने खुद का राजनीतिक दल बनाया 'जन अधिकार पार्टी' और 2020 के विधानसभा चुनाव में पूरे जोश के साथ मैदान में डटे हैं। सुबह से शाम तक अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में घूमकर पप्पू यादव अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में हवा बनाने में जुटे हैं। लगातार व्यस्तता के बीच पप्‍पू यादव ने जागरण के प्रधान संवाददाता सुनील राज से राजनीति के कई पहलुओं पर बात की। पेश है पप्‍पू यादव से विस्तृत बातचीत के अंश।

प्र. पप्पू यादव खुद को कॉमन मैन की आवाज क्यों कहते हैं?

उ. बिहार की जनता पिछले 30 सालों से त्रस्त है। दो भाइयों ने अपने 15-15 वर्ष के कार्यकाल में बिहार के लिए कुछ नहीं किया। पर्यटन, फूड प्रोसेसिंग, बाढ़, सुखाड़, रोजगार, किसान, बच्चियों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया। पिछले 30 वर्ष की दो सरकार की ये उपलब्धियां हैं। विपक्ष ने भी इन मुद्दों को लेकर कभी आवाज नहीं उठाई। ये तमाम मुद्दे पप्पू यादव लगातार उठाते रहे हैं। शायद यही वजह है कि लोग पप्पू यादव को 'कॉमन मैन' की आवाज मानते हैं और वही जनता इस बार कॉमन मैन की आवाज बनने वाले पप्पू यादव और उनकी पार्टी को बड़े विकल्प के रूप में देख रही है। 

प्र. पर जनता के मुद्दों की बात करने वाले नेता पर वोट के वक्त जनता भरोसा क्यों नहीं जताती?

उ. नहीं, ऐसी बात नहीं। जन अधिकार पार्टी 2015 के चुनाव के दो तीन महीने पहले अस्तित्व में आई फिर भी जनता ने हम पर काफी भरोसा किया। हमारी पार्टी को करीब दो फीसद वोट मिले। इस बार का चुनाव हम बड़े फलक पर लड़ रहे हैं। इसलिए एक चुनाव के परिणामों के आधार पर यह कहना कि जनता वोट के वक्त हम पर भरोसा नहीं करती ठीक नहीं होगा। 

प्र. बिहार के दो प्रमुख गठबंधन के बारे में आपकी क्या राय है?

उ. देखिए दोनों गठबंधन इमोशनल ब्लैकमेलर हैं। दोनों के पास कोई मुद्दा नहीं है। भाजपा हिदू-मुसलमान, पाकिस्तान, आतंकवाद और कश्मीर की बात करती है तो दूसरा गठबंधन अगड़ा-पिछड़ा की बात करता है। जनता देख रही है कि 1990 में भी जो चीजें थी वहीं 2020 में भी हैं। ये लोग सिर्फ हवा-हवाई दावे करने में विश्वास करते हैं। लेकिन पप्पू यादव ना तो सांसद हैं ना ही एमएलए फिर भी मौका कोई भी हो जनता के साथ खड़े रहने में विश्वास करता है। कोरोना में लौटे श्रमिकों की मदद हो या फिर बाढ़ के दिनों में प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने का मुद्दा हो पप्पू यादव सब जगह नजर आते हैं, जबकि मेरे पास पैसे भी नहीं हैं। मगर दूसरे लोग जनता की मदद से ज्यादा भरोसा करोड़ों-करोड़ रुपये के विज्ञापन में खर्च करने में करते हैं। 

प्र. इस बार के चुनाव में रोजगार बड़ा मुद्दा है?

उ. मैंने कहा ना ये सौदेबाज हैं। वोट दे दो तो 15 लाख देंगे। वोट दे दो तो 10 लाख रोजगार देंगे। 19 लाख रोजगार देंगे। हकीकत यह है कि लालू-नीतीश ने अपने शासन में किसी को रोजगार नहीं दिया। मगर हमने जनता से जो वादे किए हैं वे तीन साल के अंदर पूरे किए जाएंगे। 

प्र. आप चुनाव में किस प्रकार के नतीजे देख रहे हैं?

उ. जनता मुद्दों पर वोट करती है। दोनों गठबंधन के पास कोई मुद्दा नहीं। सरकार तो जनरल डायर से भी ज्यादा खतरनाक है। जो दिख गया मुंगेर में। इसके पहले की सरकार क्या थी बिहार की जनता से कुछ छिपा नहीं है। माफिया अपराधियों का गठजोड़ जनता ने देखा है। ये मुद्दे ही इस बार चुनाव में निर्णायक भूमिका अदा करने वाले हैं। 

प्र. जनता ने अगर जन अधिकार पार्टी को मौका दिया पार्टी विकास के लिए क्या करेगी?

उ. बच्चियों-महिलाओं की सुरक्षा, अपराध का नामोनिशान मिटाना, मंत्रियों अधिकारियों की संपत्ति की जांच, हर शहर में सीसीटीवी कैमरा महीने भर के अंदर, नियोजित, संविदा के पद को स्थायी करना इस जैसे सैकड़ों काम हैं जो हम प्राथमिकता पर करेंगे। 

प्र. तमाम दल इस बार नौकरी का दावा कर रहे हैं, आप भी वहीं कर रहे हैं?

उ. मैं तो अपनी बात एफेडेविट करके बोल रहा हूं। वे जो नौकरी देने का दावा कर रहे हैं झूठ है। वे क्या नौकरी देंगे जिन्होंने इस प्रदेश से नौकरी गायब कर दी। पलायन को बढ़ावा दिया। 

प्र. परिणाम आने पर पप्पू यादव उनकी पार्टी कहां होगी?

उ. मैं एमपी, एमएलए नहीं हूं तब भी जनता का सेवक हूं और जनता नकार देगी तब भी सेवक ही रहूंगा। मगर वोट के लिए मैं सौदा नहीं कर सकता। लोकसभा में हार गया तब भी जनता के बीच हूं। कोरोना में भी और बाढ़ में भी। इस बार भी जनता नकार देगी तो जनता के बेटे और सेवक की तरह ही उनके बीच रहूंगा।

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