पटना, जेएनएन। Bihar Chunav 2020 बिहार विधानसभा चुनाव-2020 में सबसे ज्यादा हंगामा रोजगार और नाैकरियों को लेकर बरपा है। एक तरह से यह चुनावी मुद्दों की मुख्य धुरी है। इस मुद्दे ने बिहार चुनाव की दिशा ही बदल दी है। राजद महागठबंधन और भाजपा-जदयू गठबंधन नाैकरियों के चुनावी मैदान पर खेल रहे हैं। राजद की तरफ से मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी तेजस्वी यादव द्वारा10 लाख सरकारी नाैकरी देने का वादा करते हुए हंगामा मच गया। मुख्यमंत्री नीतीश कमार ने तो यादव के वादे को बोगस करार दिया है। 

लालू-राबड़ी के 15 साल के शासन में 95 हजार को मिली सरकारी नाैकरी

देश के अन्य राज्यों के मुकाबले बिहार में बेरोजगारी कुछ ज्यादा है। यहां नाैजवानों की संख्या भी अन्य राज्यों के मुकाबले अधिक है। इस कारण चुनाव में रोजगार मुद्दा बन गया है। बिहार चुनाव-2020 में नाैकरी एक मुद्दा बन गया है। राजद विधायक दल के नेता तेजस्वी यादव ने महागठबंधन की सरकार बनने पर कैबिनेट की पहली बैठक में ही 10 लाख युवाओं को सरकारी नाैकरी देने का निर्णय लेने का वादा किया है। इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 10 लाख लोगों को सरकारी नाैकरी बात बोगस करार दिया है। उन्होंने कहा है कि यह लोगों को भ्रमित करने की बात है। उन्होंने सवाल भी पूछा है कि लालू और राबड़ी के 15 साल के शासन काल में कितने लोगों को सरकारी नाैकरी मिली? साथ ही खुद जवाब भी दिया है-मात्र 95 हजार लोगों को 15 साल में सरकारी नाैकरी मिली। हालांकि तेजस्वी का वादा असर कर गया है। भाजपा ने भी सरकार बनने पर 19 लाख रोजगार सृजन की बात कह रही है। 

कांग्रेस ने किया 'डिग्री लाओ-नाैकरी पाओ' का  वादा

नौकरी और रोजगार के मुद्दे को लपकने के लिए कांग्रेस ने भी बड़ा बयान दे डाला है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा है कि हमारी सरकार बनी तो डिग्री दिखाओ-नाैकरी पाओ की व्यवस्था लागू करेंगे। हालांकि उन्होंने यह बयान स्वास्थ्य विभाग के संबंध में डॉक्टरों की बहाली के लिए दिया है। लेकिन इसके मतलब तरह-तरह के निकाले जा रहे हैं। इसी के साथ राजनीतिक हंगामा भी तेज हो गया है। सवाल यह है कि सभी डिग्रीधारी को सरकारी नाैकरी देना क्या संभव है?

 

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