किशनगंज, जेएनएन। Bihar Assembly Elections 2020 : नेपाल और बंगाल की सीमा पर अवस्थित ठाकुरगंज विधानसभा क्षेत्र कई मायनों में खास है। महाभारतकालीन इतिहास और बंगाल की संस्कृति की झलक यहां बखूबी मिलती है। गंजा जमुनी तहजीब और सांझी विरासत की मिसालें अब भी कायम है। नॉर्थ ईस्ट का प्रवेश द्वार कहा जाने वाला किशनगंज जिले का ठाकुरगंज विधानसभा सीट बेहद महत्वपूर्ण है। राजनीति व सांस्कृतिक रुप से यह इलाका काफी समृद्ध रहा है। इसका गौरवशाली इतिहास भी है। लेकिन विधानसभा चुनाव के आईन में बात राजनीति की हो रही है। ...तो स्पष्ट है कि यहां आवाम ने किसी सभी दलों को बारी-बारी से मौका दिया है।

हालांकि 1952 से अब तक सात बार कांग्रेस को इस सीट पर जीत मिल चुकी है। लेकिन 1977 में यानी संपूर्ण क्रांति के दौर में परिस्थितियां बदली तो जनता पार्टी, जनता दल, भाजपा, समाजवादी पार्टी, लोजपा व जदयू के उम्मीदवारों को मौका मिला। अव्वल तो यह कि लालू के लहर में 1995 में भाजपा प्रत्याशी को ताज मिला तो 2010 में एनडीए की आंधी में राजद के सहयोगी रहे लोजपा के सिर जीत का सेहरा बंधा।

1977 में लगातार चार बार विधायक रहे मो. हुसैन आजाद को जनता पार्टी के मु. सुलेमान के हाथों शिकस्त मिली। फिर 1990 में जनता दल से मु. सुलेमान दोबारा विधायक चुने गए। जबकि 1995 में लालू की लहर में भी भाजपा के सिकंदर सिंह इस सीट पर कमल खिलाने में कामयाब रहे। इसी तरह अक्टूबर 2005 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर गोपाल अग्रवाल जीत कर विधानसभा पहुंचे। 2010 में राजग की आंधी में भी नौशाद आलम ने राजद के सहयोगी पार्टी लोजपा का झंडा बुलंद किया। फिर 2015 में वे जदयू उम्मीदवार के तौर पर जीते।

सात बार रहा पिता-पुत्र का कब्जा

- 1952 में अस्तित्व में आई ठाकुरगंज विधानसभा सीट पर एक दो नहीं बल्कि सात बार पिता पुत्र का कब्जा रहा। यानी आधे से अधिक समय तक एक ही परिवार का दबदबा कायम रहा। पहले चुनाव में अनंत कुमार बसु विधायक चुने गए थे। इसके बाद लगातार तीन चुनाव में मो. हुसैन आजाद को जीत मिली। जनता पार्टी की लहर में वे 77 में चुनाव जरूर हार गए लेकिन 80 में उन्होंने कमबैक किया। 80 के बाद 85 में भी उन्होंने जीतकर यह सीट कांग्रेस की झोली में डाला। 90 में शिकस्त मिलने के बाद उनके पुत्र डॉ. जावेद आजाद (किशनगंज के वर्तमान सांसद)95 में मैदान में उतरे। हालांकि पहले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के हाथों जबरदस्त शिकस्त मिली। लेकिन 2000 व फरवरी 2005 के चुनाव में वे लगातार दूसरी बार ठाकुरगंज विधानसभा से चुने गए।

 

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