नई दिल्ली, एएनआइ। असम के मंत्री और भाजपा नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने उपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। चुनाव आयोग को दिए अपने जवाब में सरमा ने कहा है कि विपक्षी दल बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के नेता हग्रामा मोहिलरी पर की गई उनकी टिप्पणी कोई धमकी नहीं है। कांग्रेस ने 30 मार्च को सरमा पर आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से शिकायत की थी।

कांग्रेस का आरोप था कि भाजपा नेता ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी का दुरपयोग कर मोहिलरी को जेल भेजने की धमकी दी थी। मामले में आयोग ने सरमा को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। वहीं, शुक्रवार को चुनाव आयोग ने सरमा पर कार्रवाई करते हुए उनके चुनाव प्रचार करने पर 48 घंटे का प्रतिबंध लगा दिया था। बता दें कि बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट असम में कांग्रेस की सहयोगी पार्टी है।

चुनाव आयोग को दिए अपने जवाब में सरमा ने कहा है कि उनकी टिप्पणी का मतलब है कि जांच एनआईए को सौंपी जा सकती है क्योंकि अपराध की घटना का स्थान अंतरराष्ट्रीय और अंतर-राज्य सीमा के पास पड़ता है। उन्होंने मामले के संबंध में मोहिलरी के नाम का उल्लेख करने को भी उचित ठहराया। सरमा का कहना है कि मामले में चल रही जांच में भी मोहिलरी का नाम सामने आया है। चुनाव आयोग को दिए अपने जवाब में उन्होंने कहा कि आईजीपी असम ने असम की सरकार को इस आधार पर जल्द से जल्द एनआईए को जांच स्थानांतरित करने पर विचार करने के लिए कहा है।

बता दें कि असम में गुरुवार को हुए दूसरे चरण में 74.76 फीसदी मतदान हुआ। असम में तीन चरणों में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान कराए जा रहे हैं। असम में तीसरे और अंतिम चरण का मतदान छह अप्रैल को कराया जाएगा। इसी चरण में खुद बिस्व सरमा की सीट पर भी वोटिंग होनी है। 

Edited By: Manish Pandey