गुवाहाटी, आइएएनएस। असम में पहली बार कोई गैर-कांग्रेसी गठबंधन लगातार दूसरी बार सरकार बनाने जा रहा है। रविवार को हो रही मतगणना में समाचार लिखे जाने तक भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) या 'मित्रजोट' 126 में से 75 सीटों पर आगे चल रहा था, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाला 'महाजोट' 45 सीटों पर आगे था।

भाजपा के सभी प्रमुख उम्मीदवार अपनी-अपनी सीटों पर आगे चल रहे थे। इनमें मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल पूर्वी असम की मजुली सीट से जीत चुके हैं। वहीं राज्य के वित्त मंत्री हिमंता बिस्व सरमा जलुकबाड़ी से और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास पटाचारकुची से आगे थे। कांग्रेस के कई शीर्ष नेता अपनी सीटों पर पिछड़ रहे थे। इनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा और पार्टी के विधायक दल के नेता देबब्रत सैकिया क्रमश: गोहपुर और नाजिरा सीट से पीछे चल रहे थे।

राज्य विधानसभा की 126 सीटों में से भाजपा 56 सीटों पर आगे थी। जबकि उसकी गठबंधन सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) 11 सीटों पर और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) आठ सीटों पर आगे थीं। वहीं, कांग्रेस 29 सीटों पर आगे थी, जबकि उसकी सहयोगी आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआइयूडीएफ) 14 सीटों पर, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) व भाकपा एक-एक सीट पर आगे चल रहे थे। निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने वाले रायजोर दल के अध्यक्ष और जेल में बंद नेता अखिल गोगोई शिवसागर सीट से आगे चल रहे थे। 

मुस्लिमों में पैठ रखने वाली एआइयूडीएफ 14 सीटों पर आगे थी जबकि 2016 के चुनावों में उसने 13 सीटें जीती थीं। पिछले चुनाव में 12 सीटें जीतने वाली बीपीएफ पश्चिम असम के बोडोलैंड क्षेत्र की सिर्फ एक सीट से थी।दक्षिण असम की बराक घाटी के तीन जिलों काचर, करीमगंज और हेलाकांडी में 15 विधानसभा सीटें हैं। इनमें से 11 सीटों पर 'महाजोट' और भाजपा व उसके सहयोगी चार सीटों पर आगे थे। पिछले चुनावों में बराक घाटी में भाजपा ने आठ और कांग्रेस ने सात सीटों पर जीत हासिल की थी। तब अकेले भाजपा ने 60 सीटों पर जीत हासिल की थी।

Edited By: Arun Kumar Singh