नई दिल्ली, जेएनएन। पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में बंगाल का शोरगुल भले ही सबसे अधिक है। लेकिन असम का चुनाव भी कम अहम नहीं है। वहां पर मुकाबला त्रिकोणीय है यानी तीन गठबंधन सीधे मुकाबले में दिख रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि असम में छोटे दल भी चुनाव परिणाम पर बड़ा असर डाल सकते हैं। असम में बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ सीधी टक्कर में दिख रहा है। एक तीसरा मोर्चा स्थानीय पार्टियों एजेपी और आरडी का है। 

असम चुनाव के परिणाम छोटी क्षेत्रीय पार्टियों के प्रदर्शन पर भी निर्भर

इन गठबंधनों के साथ असम की छोटी क्षेत्रीय पार्टियों की मौजूदगी का असर इस पूर्वोत्तर राज्य के चुनाव परिणाम पर देखने को मिल सकता है।1-बीजेपी संग यूपीपीएलसबसे पहले बात करते हैं कि कौन सी क्षेत्रीय छोटी पार्टी इस चुनाव में बीजेपी का समर्थन कर रही है। इस पार्टी का नाम है, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल)। 

क्यों अहम है यूपीपीएल 

यह असम के बोडोलैंड क्षेत्र की पार्टी है और पिछले साल बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) में बीजेपी के साथ इसने हाथ मिलाया था। पार्टी के मुखिया आल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद बोरो हैं जिन्हें केंद्र और बोडो समूहों के बीच शांति समझौतों में अहम भूमिका के लिए जाना जाता है। यूपीपीएल इस बार के चुनाव में बीजेपी के साथ है और आठ सीटों पर चुनाव लड़ रही है। रोचक बात यह है कि पार्टी प्रदेश की तीन सीटों पर बीजेपी के साथ दोस्ताना मुकाबला भी करेगी। 

2-बीपीएफ है कांग्रेस के साथ

असम में कांग्रेस गठबंधन की बात की जाए, तो छोटी क्षेत्रीय पार्टी के रूप में उसके पास बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट यानी बीपीएफ का साथ है। बीपीएफ बोडोलैंड क्षेत्र की एक प्रभावशाली पार्टी है और पूर्व में बीजेपी की साझीदार रह चुकी है। इसके मुखिया हेगरामा मोहिलारी हैं जिन्होंने इस बार कांग्रेस का हाथ थामने का फैसला किया है। क्यों अहम है बीपीएफ: असम की विधानसभा में बीपीएफ के पास 12 सीटें हैं। इस पार्टी की अहमियत इसी बात से समझी जा सकती है कि पिछले साल दिसंबर में बीटीसी में 40 सीटों पर हुए चुनाव में बीपीएफ ने सबसे अधिक 17 सीटें जीती थीं। इस चुनाव में दूसरे नंबर पर यूपीपीएल थी जिसे 12 सीटें मिली थीं जबकि बीजेपी को नौ और कांग्रेस को एक सीट मिली थी। 

3-एजीएम भी कांग्रेस के साथ

कांग्रेस के खेमे में आंचलिक गण मोर्चा (एजीएम) भी एक ऐसी ही क्षेत्रीय पार्टी है जो असम चुनाव पर असर डाल सकती है। राज्यसभा सांसद अजित कुमार भूयन के नेतृत्व वाली एजीएम इस बार कांग्रेस गठबंधन की तरफ से दो सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

4-एजेपी और आरडी का तीसरा मोर्चा

बीजेपी और कांग्रेस के अलावा असम में एक तीसरा मोर्चा भी सक्रिय है। असम जातीय परिषद (एजेपी) और राइजोर दल (आरडी) ने मिलकर एक गठबंधन इस बार असम के चुनाव में बनाया है। यह दोनों ही पार्टियां सीएए विरोधी आंदोलन की देन हैं। 

Edited By: Arun Kumar Singh